
स्वाति की उपलब्धि पर मुंह मीठा कराती मां। साथ में पिता और बहन नेहा।
ताबीर हुसैन @ रायपुर
सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। मिसाइलमैन एपीजे अब्दुल कलाम के ये क्रांतिकारी विचार युवाओं के आदर्श हैं। उनके विचार सपने देखने और उसे पूरा करने के लिए प्रेरित करते हैं। जिले के खरोरा से लगे इल्दा के किसान परिवार की बेटी स्वाति साहू भी इनमें से एक है। घर में कलाम के पोस्टर और जेहन में उनकी जीवनी, उपलब्धि और प्रेरणादायक विचार ने स्वाति को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) में साइंटिस्ट बना दिया। स्वाति के पिता धनेश कुमार साहू बालोद जेल में मुख्य प्रहरी हैं। मां उत्तरा साहू गृहिणी।
स्वाति ने बताया, प्राइमरी तक की पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। इसके बाद बारहवीं तक नवोदय और साल 2016 में बिलासपुर शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन से ग्रेजुएशन किया। इसी दौरान मैंने न्यूक्लियर एनर्जी पर काम करने का मन बना लिया था। गेट क्लियर करने के बाद सम्भावनाओं के द्वार खुल जाते हैं। इसलिए मैंने गेट की प्रिपरेशन शुरू कर दी।
रैंकिंग के लिए 3 बार दिया गेट
पहली बार जब गेट दिया तो रैंक 7800 आई। मैं थोड़ा निराश जरूर हुई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 2018 में रैंक सुधरकर 1800 आई। इसके बाद 2019 में मैं 1000 रैंक लाने में सफल रही। रैंक सुधारने के लिए मुझे तीन बार गेट देना पड़ा। ये सब कलाम साहब के विचारों से संभव हो पाया।
डीआरडीओ में चूक गई
मैंने डीआरडीओ के लिए भी ट्राई किया था। इंटरव्यू तक पहुंची लेकिन कुछ नम्बरों से चूक गई। बार्क के लिए भी मैंने अप्लाई किया था। यहां मेरा सलेक्शन हो गया।
इंटरव्यू से अंदाजा हो गया था
बार्क में इंटरव्यू करीब सवा घण्टे चला। आपके आंसर के हिसाब से पेनल सवाल पूछते जाता है और इंटरव्यू लम्बा होने लगता है। यह एक तरह से सफलता के संकेत है। इसलिए मुझे अंदाजा हो गया था। इंटरव्यू में किसी भी सवाल का जवाब सही या गलत होने से ज्यादा आपकी उस सब्जेक्ट में एप्रोच मायने रखती है। पांच पसंदीदा विषय पर डीप नॉलेज देखा जाता है। ग्रेजुएशन के बाद कोचिंग वगेरह मिलाकर मैंने साढ़े चार साल जमकर तैयारी की थी। इसका मुझे भरपूर लाभ मिला।
Updated on:
15 Jan 2021 07:05 pm
Published on:
15 Jan 2021 07:00 pm

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