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विकार को दूर करने के लिए औषधि का काम करती है तप : सुभद्रा श्रीजी

शरीर में किसी भी प्रकार के विकार को दूर करने के लिए तप औषधि का काम करती है। तप से भव का भ्रमण मिटता है व तप से मुक्ति निकट आती है। सतत चलते -चलते जैसे मशीन भी मेंटनेंस मांगती है, वैसे ही क्रियाशील शरीर भी आराम मांगता है।

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विकार को दूर करने के लिए औषधि का काम करती है तप : सुभद्रा श्रीजी

विकार को दूर करने के लिए औषधि का काम करती है तप : सुभद्रा श्रीजी

नवापारा राजिम। अक्षयनिधी, समवसरण, विजयकसाय तप, अठाई तप आदि तपस्याओं के अनुमोदनार्थ प्रात: 9 बजे श्वेताम्बर जैन मंदिर प्रांगण से शोभायात्रा निकली। जिसमें पू. शुभंकरा श्रीजी, पू. ज्ञानोदया श्रीजी मसा के साथ अपने करकमलों में श्रीजी की प्रतिमा लिए अजय कोचर, अखंड दीप लिए अक्षयनिधीतपाराधक व पोथाजी मानक पर लिए आशादेवी बोथरा, साथ में मानक पर कलश लिए महिलाएं शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रही थीं।
मंदिर भ्रमण के बाद शोभायात्रा बहुमान समारोह में बदल गई। अपने उद् बोधन में पू. सुभद्रा श्रीजी मसा ने कहा कि शरीर में किसी भी प्रकार के विकार को दूर करने के लिए तप औषधि का काम करती है। तप से भव का भ्रमण मिटता है व तप से मुक्ति निकट आती है। सतत चलते -चलते जैसे मशीन भी मेंटनेंस मांगती है, वैसे ही क्रियाशील शरीर भी आराम मांगता है। आज के समारोह में मुख्य रूप से तपस्वी सागर खंबाती 11 उपवास व रेखा बंगानी (पंडरिया) 11 उपवास की तपस्या के साथ साथ खुशी बोथरा, पलक रायसोनी, शुभ झाबक, दिव्या छल्लानी, चारूल सांखला आदि अठाई तपाराधकों का बहुमान श्रीसंघ द्वारा किया। इसके साथ तेले की तपस्या अर्थात 3 उपवास करने वालों का बहुमान श्रीसंघ द्वारा किया गया
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क्षमा बिना सम्यकत्व नहीं : साध्वी सुभद्रा श्रीजी
नवापारा राजिम। क्षमा जिनवाणी का सार है। क्षमाभाव से दिल में जलती हुई क्रोध की अग्नि ज्वाला शांत हो जाती है, पवित्र प्रेम पैदा होता है और मैत्री की सुवास उत्पन्न होती है। यह मनुष्य भव समझदारी का भव है। वैमनस्यता का व्यवहार हम न करें, कुछ भी कम ज्यादा कहने में आ जाए तो तुरंत उसका समाधान ढूंढ लें। सबका हित चाहना ही मनुष्य जीवन का सार है। श्वेेताम्बर जैन मंदिर प्रांगण में सामूहिक क्षमायाचना कार्यक्रम में उक्त बातें पू. शुभंकरा श्रीजी ने कही।
पू. सुभद्रा श्रीजी ने कहा कि फर्नीचर बनाने के लिए साफ सुधी लकड़ी आवश्यक है। उसमें किसी प्रकार की गांठ नहीं होनी चाहिए। वैसे ही जीवन जीने के लिए साफ दिल होना चाहिए, उसमें किसी प्रकार भी वैमनस्यता की गांठ नहीं होनी चाहिए। जो वीर होगा, वही क्षमा प्रदान करेगा व क्षमा मांग लेगा। क्षमा के बिना वह कभी सम्यकत्व प्राप्त नहीं कर सकता। क्षमा से आत्म शांति मिलती है. कुछ व्यवहार में गलती हो भी जाए तो तुरंत उसका समाधान ढूंढ लेना चाहिए, न कि मन में संजोय रखना है। इसीलिए जिनशासन में क्षमा का बड़ा महत्व है।
समारोह में संघ प्रमुख ऋषभचंद बोथरा, जैनम परिवार से राजेन्द्रपारख, चातुर्मास समिति से अनिल झाबक, मनोहर गुप्ति मंडल से मंजू पारख, तेरापंथ संघ से संपत लाल चौरडिय़ा, राजिम श्रीसंघ से उगमराज कोठारी. गुरुदेव भक्त मंडल से सौरभ बाफना, जैन पाठशाला समिति से आर्या दुग्गड़, मनोहर बहुमंडल से संगीता पारख, राजकुमारी चौरडिय़,ा जैन नवयुवक मंडल से आदित्य गोलछा, नवगठित वीरा ग्रुप से श्रेया भंसाली, विहार सेवा ग्रुप से अभिषेक दुग्गड़ ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन पायल बाफना ने किया। इसी अवसर पर सेवाभावी जैनम परिवार द्वारा स्वल्पाहार की व्यवस्था न्यू जैन भवन में की गई।