
अनुपम राजीव राजवैद्य/रायपुर. खतरनाक बीमारी कैंसर से पीडि़तों के लिए ये खबर मददगार हो सकती है। छत्तीसगढ़ के इन तीन प्रकार के चावल को रोजाना 200 ग्राम खाने से कैंसर की बीमारी से लड़कर जिंदगी की जंग को जीता जा सकता है। वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ में धान की तीन ऐसी प्रजातियां विकसीत की हैं, जिनमें कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने की शक्ति पाई गई है। इस नए अनुसंधान से कैंसर के इलाज में आशा की एक नई किरण जागी है।
बार्क में रिसर्च
मुंबई के भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) में रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से अनुसंधान किया जा रहा है। अनुसंधान में छत्तीसगढ़ की तीन औषधीय धान प्रजातियों- गठवन, महाराजी और लाईचा में फेफड़े एवं स्तन के कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के गुण पाए गए हैं। इनमें से लाईचा प्रजाति कैंसर की कोशिकाओं का प्रगुणन रोकने और उन्हें समाप्त करने में सर्वाधिक प्रभावी साबित हुई है। औषधीय धान की ये तीनों प्रजातियां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में संगृहीत जर्मप्लाज्म से ली गई हैं।
ब्रेस्ट कैंसर सेल्स को नष्ट करने में प्रभावी
प्रयोगशाला में किए गए अनुसंधान के निष्कर्षों से पता चलता है कि इन तीनों किस्मों के मेथेनॉल में बने एक्सट्रेक्ट ने हयूमन ब्रेस्ट कैंसर और हयूमन लंग कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को ना केवल रोक दिया, बल्कि कैंसर कोशिकाओं को नष्ट भी कर दिया। धान की इन तीनों किस्मों में से लाईचा किस्म ब्रेस्ट कैन्सर सेल्स को नष्ट करने में सबसे प्रभावी साबित हुई। लंग कैंसर सेल्स को नष्ट करने में तीनों किस्में लगभग बराबर प्रभावी रहीं। हयूमन ब्रेस्ट कैंसर सेल्स के सम्बंध में किए गए अनुसंधान में गठवन धान के एक्सट्रेक्ट ने जहां 10 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट किया। वहीं महाराजी के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 35 प्रतिशत और लाईचा के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 65 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट कर दिया। इसी प्रकार हयूमन लंग कैंसर के सम्बंध में किए गए अनुसंधान में गठवन धान के एक्सट्रेक्ट ने जहां 70 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट किया, वहीं महाराजी के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 70 प्रतिशत और लाईचा के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 100 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट कर दिया। कैंसर सेल्स नष्ट करने के लिए आवश्यक एक्टिव इन्ग्रेडिएट की मात्रा 200 ग्राम चावल प्रतिदिन खाने से प्राप्त की जा सकती है।
इन्होंने किया रिसर्च
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई के मध्य हुए अनुबंध के तहत बार्क में अनुसंधान किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के एमएससी के छात्र निषेष ताम्रकार द्वारा बार्क के रेडिएशन बायोलॉजी एंड हेल्थ साइंस डिवीजन के वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा और न्यूक्लियर एग्रीकल्चर एंड बायोटेक्नोलॉजी डिवीजन के वैज्ञानिक डॉ. बी.के. दास के मार्गदर्शन में अनुसंधान किया। अनुसंधान में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के जर्मप्लाज्म में संगृहीत औषधीय धान की तीन किस्मों गठवन, महाराजी और लाईचा के एक्सट्रेक्ट का प्रयोग मानव ब्रेस्ट कैंसर सेल्स (एम.सी.एफ.-7) एवं मानव लंग कैंसर सेल्स (ए.-549) के प्रगुणन को रोकने के लिए किया गया।
अगले चरण की योजना कर रहे तैयार
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील ने बताया कि अनुसंधान के अगले चरण में इन चावल की किस्मों से एक्टिव तत्व अलग करने एवं उनका चूहों पर प्रयोग करने की योजना तैयार की जा रही है।
Updated on:
17 Feb 2018 12:07 pm
Published on:
17 Feb 2018 07:30 am
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