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रावण दहन के दौरान रायपुर में भी पटरी पर रहती है भीड़, थम जाते हैं ट्रेनों के पहिए

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दो दशक से डब्ल्यूआरएस मैदान में दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। यहां भी अमृतसर की तरह रावण दहन पटरी के किनारे होता है। आयोजन में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। इस दौरान जो भी ट्रेन पटरी से गुजरती है, उसके पहिए कुछ देर के लिए रुक जाते हैं।
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रायपुर

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Dhal Singh

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Updated: 21 Oct 2018, 6:58 PM IST

ravan dahan

रावण दहन के दौरान रायपुर में भी पटरी पर रहती है भीड़, थम जाते हैं ट्रेनों के पहिए

रायपुर. दशहरा के दिन अमृतसर में रावन दहन के दौरान पटाखों के शोर में भीड़ को ट्रेन ने कुचल दिया। इसमें 60 लोगों की मौत की खबर जिसने भी सुना, उसने कुछ देर के लिए अपना दिल थाम लिया। इसी तरह का नजारा सालों से राजधानी रायपुर के डब्ल्यूआरएस मैदान में दशहरा उत्सव पर रावण दहन के दौरान रहता है। यहां हर साल हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। हालात एेसे होते हैं कि डब्ल्यूआरएस के छोटे स्टेशन से लेकर डब्ल्यूआरस क्रासिंग तक लोगों की भी भीड़ पटरी पर जमा हो जाती हैं। लेकिन दुघर्टना के मद्देनजर पिछले 20 साल से दशहरा के दिन रायपुर जंक्शन से छूटने वाली आधा दर्जन ट्रेनों के पहिया कुछ देर के लिए थाम दिए जाते हैं। वहीं पटरी पर खड़ी भीड़ को हटाने के लिए जीआरपी और रेलवे पुलिस को पसीना छूट जाता है। भीड़ हटने के बाद ही स्टेशन और आउटर पर खड़ी गाडि़यों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाई जाती हैं।

शुक्र है नहीं हुआ अमृतसर जैसा हादसा
शुक्र है, अमृतसर जैसी क्रॉसिंग पर एेसा हादसा कभी नहीं हुआ, और भविष्या में कभी न भी हो। दशहरे के दिन रेलवे प्रशासन अपनी फोर्स को यहां शाम 5 बजे से ही चौकन्ना कर देता है। जिला पुलिस के जवान भी यहां तैनात कर दिए जाते हैं। राजधानी रायपुर में रेलवे कैम्पस यानी डब्ल्यूआरएस के मैदान में शहर का सबसे बड़ा दशहरा उत्सव होता है। इस आयोजन में शासन-प्रशसन अपनी पूरी ताकत झोंक देता है, उसी तर्ज पर दशहरा उत्सव देखने वालों का सैलाब उमड़ता है। यहां आकाश चूमती सतरंगी आतिशबाजी का नजारा दिखाई देता है, तो विशालकाय रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले धू-धूकर जलते हैं।

थम जाते हैं ट्रेनों के पहिए
आज लगभग 20 साल हो गए, यहां रावण जलने तक टे्रन रोकने की भी परंपरा ही चली आ रही है। रेलवे प्रशासन भी लोगों के उत्सव में कभी बाधक नहीं बना। 'पटरीÓ पर अपनी फोर्स को समय रहते ही उतार देता है। रायपुर पोस्ट प्रभारी सहित आरपीएफ और खमतराई थाने की 50 से 60 जवान पटरी और क्रासिंग से लोगों को हटाने और गाडि़यों को निकलवाने में जुटी रहती है। किसी प्रकार के हादसे रोकने में इस तरह इंतजाम किए जाते है। डब्ल्यूआरएस के छोटे स्टेशन तक पहुंचते-पहुंचते ट्रेन के पहिए थमने लगते हैं। शालीमार एक्सप्रेस, अमरकंटक एक्सप्रेस, लिंक एक्सप्रेस, नवतनवा एक्सप्रेस, रायपुर-बिलासपुर लोकल सहित आधा दर्जन गाडि़यों के पहिए 40 से 50 मिनट तक थम जाते हैं। इन ट्रेनों में बैठे यात्री डब्ल्यूआरएस का दशहरा उत्सव देखते हुए धीरे-धीरे खिसकते हैं। डब्ल्यूआरस क्रासिंग पार करने के बाद ही गाडि़यां स्पीड पकड़ती हैं।

जुटते हैं 10 से 12 हजार लोग
डब्ल्यूआरएस के जिस मैदान में दशहरा उत्सव मनाया जाता है। वहां तक पहुंचने में एक हिस्से की लंबी पटरी और डब्ल्यूआरएस जैसी बड़ी क्रॉसिंग को पार करना पड़ता है। लोगों की भीड़ इतनी अधिक रहती है कि क्रॉसिंग के आसपास के क्षेत्र खमतराई, सन्यासीपारा, भनपुरी, डब्ल्यूआरएस बस्ती पूरी तरह से लगी हुई है। इसके अलावा शहर के हर मोहल्ले और कॉलोनियों से लोग पहुंचते हैं। करीबन 10 से 15 हजार लोगों की भीड़ जुटती है, अशिकांश तो पटरी से लेकर क्रासिंग तक जमे रहते हैं।

वर्जन
डब्ल्यूआरएस क्रॉसिंग पर शाम 5 बजे से ही फोर्स तैनात कर दी जाती है। लोगों को समझाइश के साथ पटरी से हटाया जाता है। उत्सव की वजह से पटरी जाम करने पर किसी के खिलाफ रेलवे एक्ट की कार्रवाई भी नहीं करते। ट्रेन चालक स्थिति को देखते हुए गाडि़यां आगे बढ़ाते हैं।
दिवाकर मिश्रा, पोस्ट प्रभारी, आरपीएफ

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