
sleeping woman (photo-AI)
World sleep day 2026: मोबाइल, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढते उपयोग ने युवाओं की नींद पर सीधा असर डाला है। देर रात तक वेब सीरीज देखना, चैटिंग करना और लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करना अब आम आदत बन चुकी है, जिसका असर उनकी सेहत और मानसिक संतुलन पर भी दिखने लगा है। 13 मार्च को मनाए जाने वाले वर्ल्ड स्लीप डे के मौके पर युवाओं की बदलती लाइफस्टाइल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए रोज लगभग 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है, लेकिन युवाओं की दिनचर्या में यह संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। रात में मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर की प्राकृतिक स्लीप साइकिल को प्रभावित करती है। इससे दिमाग को आराम का संकेत देर से मिलता है और नींद आने में समय लगता है।
तेलीबांधा तालाब परिसर में समय बिताने आए युवाओं ने बातचीत में बताया कि पढ़ाई, असाइनमेंट, ऑनलाइन क्लास और मनोरंजन के अधिकांश साधन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही उपलब्ध हैं। ऐसे में देर रात तक स्क्रीन के संपर्क में रहना लगभग सामान्य हो गया है। कई बार सोशल मीडिया का उपयोग करते करते समय का पता ही नहीं चलता और सोने का समय आगे खिसक जाता है।
विश्व स्लीप डे पर इस वर्ष की थीम 'स्लीप वेल, लिव बेटर' रखी गई है, जिसका उद्देश्य लोगों को अच्छी नींद के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ओटीटी के कारण युवाओं की नींद प्रभावित हो रही है। लगातार नींद की कमी से तनाव, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने और मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वस्थ जीवन के लिए रोज लगभग 7–9 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है। नियमित समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं, सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का उपयोग कम करें, शाम के बाद कैफीन से बचें और शांत वातावरण में सोने की कोशिश करें। -डॉ.अभिजीत केके, सीनियर कंसल्टेंट. आईटीएसए हॉस्पिटल, रायपुर
Updated on:
13 Mar 2026 01:28 pm
Published on:
13 Mar 2026 01:27 pm
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