
रायपुर. Yoga For Pregnancy: गर्भावस्था में अक्सर महिलाएं योग-व्यायाम करने से बचती हैं, लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो सही तरह से नियमित योग करने से न केवल महिला, बल्कि होने वाले शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। इससे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव के साइड इफेक्ट भी घटते हैं। आइए जानते हैं प्रेगनेंसी के पहले तिमाही के योग के बारे में-
ताड़ासन: दोनों पैरों के बीच में 2 इंच की दूरी रखें। हाथों को आपस में फंसाकर ऊपर की ओर खींचे। सांस लेते हुए एड़ियों को ऊपर उठाएं। इस स्थिति में 10 से 15 सेकंड तक रुके और सांस छोड़ते हुए नीचे हो।
लाभ: इससे पैर और शरीर मजबूत होता है। गर्भवती को आने वाले समय में सूजन की समस्या घटती है। पेट वाले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है। कूल्हे मजबूत होते हैं।
त्रिकोणासन: पैरों के बीच आरामदायक दूरी बनाते हुए दोनों हाथों को कंधे तक ऊपर ले जाएं। सांस छोड़ते हुए कमर से धीरे-धीरे दाहिने ओर झुके और दाहिने हाथ को दाहिने पैर के पास ले जाएं। बाई हथेली को ऊपर की ओर खोलें। 10 से 30 सेकंड रुकने के बाद सांस लेते हुए सामान्य हो जाए। इसको बाएं तरफ से भी दोहराएं।
लाभ: मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग होती है। फेफड़ों, लीवर, पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती है। सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ती है।
वीरभद्रासन: सीधे खड़े होने के बाद तीन से चार फीट दोनों पैरों के बीच में होकर चित्रानुसार स्थिति में जाएं। आगे का पैर 90 और पीछे का 15 अंश पर सीधा रखें। सांस छोड़ते हुए घुटने को झुकाएं। 10 से 30 सेकंड तक रुके। इसे दोनों तरफ से दोहराएं।
लाभ: इससे कमर और पैरों की मजबूती होती है। गर्भवती का प्रसव सामान्य होने में मदद मिलती है। इससे मानसिक संतुलन भी ठीक होता है। शरीर का बैलेंस अच्छा होता है।
मलासन: दोनों पैरों में लगभग 1 फीट का अंतर रखते हुए खड़े हो जाएं। दोनों हाथों से नमस्कार की मुद्रा में बैठें। यह यथा क्षमता ही रुकें। एक बार में 30 सेकंड तक किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर पीठ पर दीवार का सहारा ले लें।
लाभ: नियमित अभ्यास से कमर और पैरों को मजबूती मिलती है। इससे प्रसव आसान और सुरक्षित होता है।
Published on:
16 Dec 2021 03:09 pm
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