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कहीं आप भी तो नहीं खा रहे रेलवे का जनता खाना, सच्चाई जानकार उड़ जाएंगे होश

सस्ते दर पर 15 रुपए में ‘जनता खाना’ के नाम पर सुबह की बनाई हुई पूड़ी और आलू की सब्जी रात 10 बजे तक ट्रेनों (Trains) के समय तक परोसी जा रही है।

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कहीं आप भी तो नहीं खा रहे रेलवे का जनता खाना, सच्चाई जानकार उड़ जाएंगे होश

रायपुर. इस भीषण गर्मी में यात्रियों की सेहत से रेलवे खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है। सस्ते दर पर 15 रुपए में ‘जनता खाना’ के नाम पर सुबह की बनाई हुई पूड़ी और आलू की सब्जी रात 10 बजे तक ट्रेनों के समय तक परोसी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यात्रियों के खानपान की गुणवत्ता (Quality) परखने के लिए जिन अफसरों की तैनाती की गई है, वे ही जनता खाना के बेस किचन से बेखबर हैं। खुलासा हुआ कि खाद्य निरीक्षक (Food Inspector) और कमर्शियल निरीक्षक ने एक बार भी जनता खाना के किचन को देखा तक नहीं है। पत्रिका टीम की पड़ताल में यह सामने आया।

‘पत्रिका’ टीम सोमवार को दोपहर 12.30 बजे स्टेशन पहुंची। जनता खाना बनाने से लेकर स्टेशन में पहुंचाने के समय की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वेंडरों से चर्चा में यह सामने आया कि सुबह जो पैकेट आता है, वह रात तक चलता है।

गाड़ी आने के समय चार ठेलियां भी दौड़ती रहती है। प्लेटफार्म एक पर एक भोजनालय कैंटीन संचालित है, जिसमें जनता खाना से लेकर भोजन बनाने के लिए किचन उपलब्ध कराया है।

इसके साथ ही स्टेशन में खानपान स्टॉल का ठेका सनसाइन केटरर्स को दिया गया है। शर्तें यह रखी गई है कि यह ठेकेदार हर स्टॉल में आम यात्रियों के लिए जनता खाना पर्याप्त मात्र में रखेगा। लेकिन प्लेटफार्म के स्टॉलों में कहीं एक तो कहीं दो पैकेट केवल दिखावे के लिए ही मिले।

पूछने पर पता चला कि सात पूड़ी, आलू की सब्जी और एक पाउच पैकेट में बंद खाना सुबह 8-9 बजे के बीच पहुंच जाता है, वहीं रात नौ बजे के बाद तक चलता है। उसी समय घूम-घूमकर ठेलियां में बेचने वाले वेंडरों को भी थोक में थमा दिया जाता है।

सुबह गाड़ी में भरकर कर दी जाती है सप्लाई

स्टेशन में 14 खाना-पान स्टॉलों का संचालन करने वाले सनसाइन केटरर्स के पास किचन की व्यवस्था नहीं है। जबकि रेलवे प्रशासन ने स्टॉलों में 15 रुपए पैकेट वाला जनता खाना स्टॉलों में रखना अनिवार्य किया है। पड़ताल में पता चला कि सनसाइन केटरर्स ने जनता खाना बनाने के लिए किसी दूसरे को ठेका दे रखा है, जो स्टेशन से डेढ़ किमी दूर गुढिय़ारी शुक्रवारी बाजार स्थित निजी मकान में बनाता है।

सुबह 8 से 9 बजे के बीच गाड़ी में भरकर स्टेशन में पहुंचा देता है। जिसे दो-दो पैकेट हर स्टॉल में रखवा दिया जाता है। इसके अलावा प्लेटफार्म में घूम-घूमकर बेचने के लिए चार ठेलियों में पूरी और आलू की सब्जी, समोसा भर दिया जाता है, उसे वेंडर दिनभर गाड़ी आने के समय बेचते रहते हैं।

दोनों समय सप्लाई की निगरानी नहीं

यात्रियों के खानपान की गुणवत्ता की स्थिति यह है कि ठेकेदार द्वारा सप्लाई किए जा रहे जनता खाना बनाने के समय की कोई मॉनिटरिंग ही नहीं की जा रही है। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। सुबह बनी हुई आलू की सब्जी शाम को यात्री कैसे खाएंगे, इसकी कोई परवाह नहीं है। केवल कागजों में ही सुबह और शाम के समय जनता खाना सप्लाई कराने के दावे किए जा रहे हैं।

संदेश पर ही जांच के लिए सैम्पल

स्टेशन कैम्पस में सनसाइन कैटरर्स का किचन नहीं है। बाहर से बनाकर ही स्टेशन में सप्लाई की जाती है। आलू की सब्जी और समोसा खराब होने के संदेश पर ही सैम्पल लेकर जांच के लिए भेजते हैं। सप्ताहभर पहले इस तरह का एक सैम्पल भेजे हैं। ठेकेदार के बेस किचन की जानकारी नहीं है।

-प्रवीण प्रियदर्शी, खाद्य निरीक्षक स्टेशन

किचन का निरीक्षण नहीं किया

खानपान स्टॉलों का ठेका सनसाइन केटरर्स को मिला हुआ है। जनता खाना बेचना स्टॉलों में अनिवार्य किया गया है। जो दस्तावेज लगाया गया है, उसमें किचन की जानकारी शुक्रवारी बाजार गुढिय़ारी में होना दी गई है। स्टेशन में सनसाइन केटरर्स का कोई किचन नहीं है।

-एसएन मिश्रा, कमर्शियल निरीक्षक स्टेशन