
सावन और अधिकमास के मौके पर शिवालयों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। हर मंदिर पर सुबह से ही अभिषेक और पूजा-पाठ का दौर शुरू हो जाता है। ऐसा ही एक विशेष मंदिर है ब्यावरा का घुरैल पहाड़ी स्थित शिवालय।
मंदसौर के पशुपतिनाथ की तर्ज पर यहां भी भगवान पशुपतिनाथ हरियाली के बीच विराजित हैं। जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां के पेड़-पौधों की विशेषता है कि अन्य जगह की अपेक्षा यहां शुद्ध वातावरण और हवा में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक है। यहां सालभर आयोजन होते हैं। मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि के मौके पर यहां मेला भरता है, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। साथ ही सावन माह में रोजाना सुबह से ही अभिषेक होते हैं। कांवड़ यात्री बड़ी संख्या में यहां विभिन्न जगह का जल भरकर लाते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। अंदर भगवान मनकामनेश्वर महादेव की गुफा है, जिसकी अपनी विशेषता है। राजनीतिक और सामाजिक, प्रशासनिक स्तर पर यहां सब सहयोग करते हैं। इस स्थान की काफी दूर तक मान्यता है। हर दिन सावन के माह यहां भक्तों का तांता सुबह से लेकर देर रात तक लगा रहता है।
मंदिर को संवारा, अब भोजन पंडाल बना रहे
मंदिर की व्यवस्थाओं का जिम्मा पशुपतिनाथ मंदिर समिति ने उठा रखा है। जिसमें आस-पास के गांवों के साथ ही ब्यावरा के सक्रिय सदस्य है। सभी के सहयोग और प्रयासों से यहां मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। पार्क एरिया वकसित किया गया। साथ ही अब भोजन शाला का निर्माण यहां किया जा रहा है। मंदिर के ठीक सामने करीब 400 मीटर दूर यह टीन शेड युक्त पूरी व्यवस्थित भोजन शाला बनाई जा रही है। जिससे भोजन प्रसादी इत्यादि बनाने वाले श्रद्धालुओं को आसानी रहे।
नाथ संप्रदाय का साधना स्थल रहा है स्थलवर्तमान में नाथ संप्रदात की सातवीं पीढ़ी के सदस्य बद्रीलाल गिरि यहां की पूजा करते हैं। वे बताते हैं कि हमारे पूर्वजों ने ही यहां पूरे समय पूजा की है। एक समय में यह नाथ संप्रदाय के संतों की तपो स्थली रही है। जहां साधना, पूजा-पाठ इत्यादि वे ही किया करते थे। काफी धार्मिक मान्यताओं वाली घुरैल पहाड़ी का पर्यावरणीय परिवेश भी काफी सुंदर है।
मान्यता : यहां गुफा में हर समय एक सा तापमान
मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के अनुसार पशुपति नाथ मंदिर के आगे पहाड़ी हिस्से में एक गुफा है, जहां भगवान मनकामनेश्वर विराजित हैं। इस गुफा की विशेषता है कि यहां हर मौसम में एक जैसा ही तापमान रहता है। यानी सर्दी हो, गर्मी हो या बारिश का मौसम, यहां का तापमान एक जैसा ही रहता है। यहां जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलती है। बताया जाता है कि यहां की आबो-हवा में ऑक्सीजन की मात्रा भी काफी ज्यादा है।
Published on:
07 Aug 2023 11:31 am

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