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राजस्थान के इस शहर में अनोखी परंपरा, गौमाता को रिझाने के चक्कर में कोई गिरा तो किसी को पटका

- कांकरोली में चौपाटी से लेकर बाजारों तक में गोक्रीडऩ देखने को उमड़े लोग, शाम को अन्नकूट लूट व दर्शन का पुण्य लाभ

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राजस्थान के इस शहर में अनोखी परंपरा, गौमाता को रिझाने के चक्कर में कोई गिरा तो किसी को पटका

राजसमंद के द्वारिकाधीश मंदिर में गोवधन पूजा के लिए गौमाता को ले जाते समय गौमाता को रिझाते ग्वालबाल।

राजसमंद. द्वारिकाधीश मंदिर में बुधवार को गोवर्धन पूजा अन्नकूट महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया। तृतीय पीठ कांकरोली के डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी ने प्रभु द्वारिकाधीश को विशेष शृंगार धराया गया। तदुपरांत प्रभु द्वारिकाधीश को सुखपाल में विराजित कर ब्रजवासी ग्वाल बालों द्वारा गोवर्धन चौक में पधराया गया। जहां गोस्वामी वेदांत कुमार और सिद्धांत कुमार ने प्रभु द्वारिकाधीश को सिहासन पर विराजित किया गयाष इसके बाद गोवर्धन चौक में गायों के बीच बने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरु हुई, जिसको गोस्वामी वागीश कुमार, वेदांत कुमार और सिद्धांत कुमार ने पूरी की पूजा संपन्न होने तक प्रभु द्वारिकाधीश को पान बीड़ा का भोग लुगाया गया। इस मौके पर ठाकुर के सेवा कर्मियों को तिलक लगाकर वेदांत कुमार ने प्रसाद भेंट किया गया। तदुपरांत गोस्वामी परिवार के सदस्यों और सेवा कर्मियों द्वारा गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की गई। इसके बाद द्वारकेश गौशाला की विशेष गौ माता द्वारा गोवर्धन पर्वत को गिचर कर उक्त रस्म को पूरा किया गया। इन दर्शनों को करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचे। वहीं दूसरी ओर शाम को द्वारिकाधीश प्रभु मंदिर से गोस्वामी परिवार के गोस्वामी डॉ वागीश कुमार वेदांत कुमार और सिद्धांत कुमार द्वारा नगर परिक्रमा की जो कि द्वारिकाधीश मंदिर से शुरू होकर रेती मोहल्ला, बोरवाड़ी, धोरा मोहल्ला होते हुए मंदिर पहुंची। तदुपरांत अन्नकूट के दर्शन खुले। इसमें प्रभु द्वारिकाधीश के सम्मुख अन्नकूट का भोग लगाया गया। इस बार इस अन्नकूट महाप्रसाद का वितरण आम श्रद्धालुओं को किया गया। इसके लिए गोवर्धन चौक में अलग से स्टॉल लगाई गई और आने वाले प्रत्येक श्रद्धालुओं को अन्नकूट का प्रसाद दोने में उपलब्ध करवाया गया। गुरुवार को प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर की ओर से गौशाला में गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।

ग्वालबालों ने गायों का रिझाया, गौमाता ने लगाई दौड़ : शहर में बुधवार को सुबह ग्वालबालों ने गायों को रिझाया। इसके तहत द्वारकेश गौशाला से ग्वालबाल गायों रिझाते हुए मुखर्जी चौराहा,जे.के. मोड़, चौपाटी पर गायों को रिझाने के लिए गौमाता के सामने क्रीडा की। गौमाता के सामने कूपी को बजाया। इससे गौमाता ग्वालबालों के पीछे गौमाता दौड़ती और जहां पर ग्वालबाल रूकता वहीं गौमाता भी रूक ठहरजाती। कई बार तो गौमाता ने कूपी बजाने वाले ग्वालबालों के पीछे दौड़ भी लगाई। इसे देखने के लिए मुख्य रोड पर मकानों की छतों पर लोगों की भीड़ लग गई। यह क्रम करीब एक घंटे जारी रहा। गायों को रिझाते हुए ग्वालबाल गौमाता को लेकर द्वारिकाधीश मंदिर लेकर पहुंचे। वहां पर क्रीडा की गई।

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