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निर्माण अनुमति दे खुद ही आंख मूंद लेती है परिषद

बमुश्किल सवा लाख की आबादी के इस शहर में बड़े प्रावधानों को लागू करना तो दूर, आधारभूत जरूरतों पर भी नगर परिषद का कोई ध्यान नहीं है। फुटपाथ, अवैध कब्जे और पार्किंग की घोर अनदेखी न केवल लोग कर रहे, नगर परिषद भी मौन साधे बैठी है।

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Ashish Joshi

May 27, 2017

Road two vehicle Parking at Nathdwara

सड़क पर वाहनों की पार्किंग

बमुश्किल सवा लाख की आबादी के इस शहर में बड़े प्रावधानों को लागू करना तो दूर, आधारभूत जरूरतों पर भी नगर परिषद का कोई ध्यान नहीं है। फुटपाथ, अवैध कब्जे और पार्किंग की घोर अनदेखी न केवल लोग कर रहे, नगर परिषद भी मौन साधे बैठी है। बिल्डिंग बायलॉज लागू करने को लेकर भी अधिकारी गम्भीर नहीं हैं। भौतिक सत्यापन किया जाए, तो लापरवाही खुलकर सामने आ सकती है।

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राजस्थान में ५० हजार से दो लाख तक की आबादी के हर न्यूनतम ३०० स्क्वॉयर मीटर आवास निर्माण में कार पार्किंग का प्रावधान है। साथ ही व्यावसायिक इमारतों में भी वाहनों की पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था करनी अनिवार्य है। निर्माण की अनुमति लेते वक्त पेश नक्शों में पार्किंग का प्रावधान दर्शा दिया जाता है, लेकिन निर्माण होने पर कहीं भी पार्किंग की जगह खाली नहीं रखी जाती। लम्बे समय से अधिकांश निर्माणों में ऐसा ही हो रहा है। नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी मौका तक नहीं देखते और निर्माण पूरा हो जाता है। बायलॉज का उल्लंघन करने पर भी कार्रवाईका प्रावधान है, पर परिषद उन पर अमल ही नहीं कर रही। शहर में नाथद्वारा रोड, सौ फीट रोड, ५० फीट रोड के अलावा बाहरी इलाकों में बन रही व्यावसायिक इमारतों में पार्किंग की भारी अनदेखी की जा रही है, वहीं व्यवस्ततम इलाकों के हालात भी बेहद खराब हैं।

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राजस्थान नगर सुधार अधिनियम, १९५९ के तहत राजसमंद का मास्टर प्लान बनाया, जो वर्ष२०१० से लागू भी हो चुका है और वर्ष २०३१ तक की जरूरतों के मद्देनजर अमल में रहेगा। अफसोस कि जिम्मेदार अधिकारी खुद इसे दरकिनार कर बैठे हैं।

दफन है सड़कों की सांसें : हैरत कि सबसे व्यस्ततम मार्ग कांकरोली-राजनगर मार्ग पर हर जगह अतिक्रमण है। राजनगर, दाणी चबूतरा, किशोर नगर, आवरी माता मंदिर, शबरी मार्केट, जलचक्की, पुराना बस स्टैण्ड, कांकरोली चौपाटी से जेके मोड़ और मुखर्जीचौराहे से आगे विवेकानंद प्रतिमा तक चप्पा-चप्पा अवैध कब्जों से अटा है। दुकानदारों ने दोनों ओर सड़क पर बोर्डलगा रखे हैं, तो कहीं दुकान का सामान फैला रखा है।

सौ फीट को छोड़ कहीं नहीं फुटपाथ : शहर में सौ फीट रोड को छोड़कर कहीं किसी भी सड़क पर फुटपाथ नजर नहीं आता है। इस मार्गपर भी अब धीरे-धीरे कब्जे होने लगे हैं। जिला परिषद भवन के पास, सिविल लाइन्स से नाथद्वारा रोड की ओर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने अतिक्रमण कर लिया है। नगर परिषद और यातायात पुलिस की ओर से कार्रवाईनहीं होने से लोगों के हौसले बुलंद हैं।

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सड़क पर पार्किंग, तो कैसे चले वाहन

- नाथद्वारा में सुधार के प्रयासों के बावजूद और बिगड़ी यातायात व्यवस्था

नाथद्वारा. शहर में प्रभु श्रीनाथजी के दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों को अपने वाहन खड़े करने के लिए मंदिर के समीप सुरक्षित पार्किंग स्थल नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, इसके चलते रिसाला चौक के बाहर सड़क के दोनों और वाहनों का जमावड़ा लग जाता है। इससे शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। शहर में अधिकांश लोग कार सहित अन्य चार पहिया वाहन लेकर पहुंचते हैं। ये अपने वाहन मंदिर के पास ले जाने की जुगत में रहते हैं। ऐसे में वे रिसाला चौक के पार्किंग के बंद होने के चलते जब वहां पहुंचते हैं तो दर्शन जाने की जल्दी में चौक के बाहर जहां जगह मिली, वहीं पर वाहन खड़े कर देते हैं।

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पार्किंग बंद होने से बढ़ी समस्या : शहर के एकमात्र वाहन पार्किंग स्थल रिसाला चौक के पिछले वर्ष राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर बंद करने के बाद से ही यहां पर वाहनों की पार्किंग की काफी समस्या आ रही है। वहीं, शहर के सुंदर विलास के सामने से निकले नए १२० फीट फोरलेन मार्ग पर भी पार्किंग का निर्माण कार्य जारी होने से मंदिर के पास कोई स्थाई विकल्प का नितांत अभाव है। इसके चलते बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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टेम्पो स्टैण्ड से भी दिक्कत : रिसाला चौक के बाहर से यातयात पुलिस एवं प्रशासन के द्वारा बिना जनहित को ध्यान में रखे व बिना आम सहमति के गत वर्ष आनन-फानन में निर्णय करते हुए शहर के माणक चौक से टेम्पो का संचालन बंद कर रिसाला चौक के बाहर से प्रारंभ कर दिया गया। इससे यहां पर दिनभर यातायात बदहाल ही रहता है। दर्शनों के समय तो यह स्थिति हो जाती है कि कई वाहन एवं टेम्पो जब एक साथ जमा हो जाते हैं तो पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है। इसके बाद भी स्थानीय प्रशासन को टेम्पो का संचालन करने के लिए स्थाई एवं आम जनता के लिए सुलभ हो, वह स्थान तय कर पाने में सफलता नहीं मिल पाई है। ऐसे में मंदिर के आसपास तथा पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को टेम्पो से बस स्टैण्ड, अस्पताल आदि कहीं भी जाने के लिए काफी दूर तक पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद वे रिसाला चौक से टेम्पो में सवार हो पाते हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों को हो रही है।

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