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7 माह में 3,800 प्राचार्यों की काउंसलिंग फिर टली, पांचवीं बार प्रक्रिया स्थगित, यथास्थान कार्यग्रहण से बिना काम हर माह मिल रहा पूरा वेतन

माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुधार और नेतृत्व को मजबूत करने की मंशा से सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर समकक्ष पदों तक वरिष्ठों के साथ-साथ युवा शिक्षकों को जिम्मेदारी देने की पहल की थी।
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Principel News

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राजसमन्द. माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुधार और नेतृत्व को मजबूत करने की मंशा से सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर समकक्ष पदों तक वरिष्ठों के साथ-साथ युवा शिक्षकों को जिम्मेदारी देने की पहल की थी। लेकिन यह पहल अब गंभीर अव्यवस्था में बदलती नजर आ रही है। पदोन्नति के बाद 3,800 से अधिक प्रधानाचार्य पिछले सात महीनों से पदस्थापन का इंतजार कर रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग अब तक उन्हें नई जगहों पर नियुक्त नहीं कर पाया है। स्थिति यह है कि एक ओर पदोन्नत प्रधानाचार्य काउंसलिंग का इंतजार करते हुए पुराने स्थानों पर बैठे हैं, तो दूसरी ओर राज्य के कई विद्यालय प्रधानाचार्य विहीन हो चुके हैं। इस पूरे मामले में अब पांचवीं बार प्राचार्य काउंसलिंग प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है।

हाईकोर्ट आदेश के बाद फिर लगी रोक

राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में दायर डी.बी. सिविल याचिका संख्या 1408/2023 (पूनम सोनी @ पूनम उपाध्याय बनाम राजस्थान राज्य व अन्य) सहित संबंधित याचिकाओं में 16 जनवरी को पारित समेकित अंतरिम आदेश की अनुपालना में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को कदम उठाना पड़ा। इसके बाद संयुक्त निदेशक (कार्मिक) द्वारा 18 जनवरी को आदेश जारी कर 12 जनवरी को जारी काउंसलिंग आदेश को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया गया।

7 माह बीते, काउंसलिंग अब भी अधर में

शिक्षा विभाग द्वारा पदोन्नत प्रधानाचार्य सात माह से अधिक समय से यथास्थान कार्यग्रहण कर काउंसलिंग की प्रतीक्षा कर रहे थे। ऑनलाइन काउंसलिंग कार्यक्रम पहले भी कई बार तय हुआ, लेकिन हर बार अंतिम समय में स्थगित करना पड़ा। अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रक्रिया फिर अनिश्चितकाल के लिए टल गई है।

एक विद्यालय में कई प्रधानाचार्य, व्यवस्था चरमराई

यथास्थान पदोन्नति के कारण प्रधानाचार्यों को आर्थिक नुकसान तो नहीं हो रहा, लेकिन विद्यालयों की आंतरिक व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक ही विद्यालय में एक से अधिक प्रधानाचार्य समकक्ष अधिकारी हो गए हैं। इससे आपसी समन्वय बिगड़ रहा है और कई प्रधानाचार्य अपने पुराने अध्यापन कालांशों में पढ़ाने से भी बच रहे हैं। नतीजतन विद्यालयी वातावरण और शैक्षणिक अनुशासन प्रभावित हो रहा है।

कई स्कूलों में प्रधानाचार्य ही नहीं

काउंसलिंग में देरी और तीन स्थानांतरण सूचियां जारी होने के बाद दूरस्थ जिलों के अनेक विद्यालयों से प्रधानाचार्य चले गए, लेकिन नए प्रधानाचार्य अब तक नहीं पहुंचे। इससे न केवल शैक्षणिक प्रबंधन बल्कि राज्य स्तरीय परीक्षाओं और प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ा है।

शिक्षक संघ का आरोप: बिना काम मिल रहा वेतन

शिक्षक संघ रेसटा ने यथास्थान कार्यग्रहण की पूरी प्रक्रिया का विरोध किया है। संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से अधिकारी बिना कार्य के पूरा वेतन ले रहे हैं, जिससे राजकोष पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद के अनुसार, उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं के चलते प्राचार्य काउंसलिंग कार्यक्रम पांचवीं बार स्थगित करना पड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि 12 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, ऐसे में जिन स्कूलों में संस्था प्रधान नहीं हैं, वहां तत्काल प्रधानाचार्य की नियुक्ति जरूरी है, ताकि परीक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।