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राजसमंद. शहर में भीषण गर्मी ने जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है। पारा बीते दो महीनों से 40 डिग्री से नीचे नहीं उतर रहा है। इस चिलचिलाती गर्मी में यदि कुछ उम्मीद थी तो वह थी नगर परिषद द्वारा स्थापित किए गए फव्वारों से, जिनसे शहरवासियों को शाम के वक्त कुछ सुकून मिल सके। लेकिन अफसोस, इन फव्वारों की हालत शहर के सिस्टम की तरह ही बदहाल है। नगर परिषद द्वारा शहर की सुंदरता और आमजन की राहत के नाम पर खर्च किए गए करीब 70 लाख रुपये अब सिर्फ शोभा बनकर रह गए हैं।
झील के पास बनाए गए फव्वारे कभी इस इलाके की शान हुआ करते थे। लोगों को इस क्षेत्र में आकर ठंडी फुहारों के बीच राहत का अनुभव होता था। लेकिन कोरोना काल में बदमाशों ने इन फव्वारों की केबलें काटकर चोरी कर लीं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना को दो साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब तक नगर परिषद ने इनकी मरम्मत तक नहीं करवाई। शहरवासियों ने कई बार परिषद से शिकायतें की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस उपेक्षा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नागरिक सुविधाओं के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही पूरी तरह से गायब है।
राजसमंद के तीन प्रमुख चौराहों पर भामाशाहों की मदद से फव्वारे लगाए गए। लेकिन विडंबना यह है कि फव्वारा चौराहा के नाम से मशहूर पं. दीनदयाल उपाध्याय सर्कल पर ही फव्वारा नहीं चल रहा है। यह चौराहा आर.के. मार्बल ग्रुप ने गोद लिया था और सुंदर निर्माण कराया गया था, लेकिन अब यह जगह बंद पड़े फव्वारे और उपेक्षा की मिसाल बन गई है। इसी तरह जेके टायर फैक्ट्री के सहयोग से बने मुखर्जी चौराहे के फव्वारे भी बंद पड़े हैं। महात्मा भूरीबाई सर्कल वहां भी स्थिति अलग नहीं है। नगर परिषद ने वहां पर भी सौंदर्यीकरण के नाम पर फव्वारा लगाया था, जो शुरू से ही एक बार भी नियमित रूप से नहीं चला।
नगर परिषद द्वारा शहर के सौंदर्यीकरण के नाम पर अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इन पैसों से पेंटिंग, गार्डनिंग, सजावटी लाइट्स और फव्वारों का निर्माण करवाया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि गर्मी के सबसे कठिन समय में एक भी फव्वारा जनता को राहत नहीं दे पा रहा है।
अगर जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल पूछे जाएं तो उत्तर होगा कि "प्रक्रिया में है", "बजट का इंतजार है" या "कंपनी से बात चल रही है"। लेकिन ये जवाब जनता सुनते-सुनते थक चुकी है। या तो नगरपरिषद प्रशासन काम करना नहीं चाह रहा या अधिकारी इन फव्वारों की दुर्दशा को देखकर आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। लेकिन जनता आज भी राहत का इंतजार कर रही है।
राजसमंद शहर के कई नागरिकों का कहना है कि फव्वारों की स्थिति देखकर लगता है कि नगर परिषद ने सिर्फ कागज़ीघोड़ेदौड़ाए हैं। स्थानीय निवासी ने बताया कि "जब झील के पास बने फव्वारे चालू रहते थे तो बच्चे-बूढ़े सब यहां आकर ठंडी हवा और पानी की फुहारों का मज़ा लेते थे। अब ये काफी समय से बंद है। ये सिर्फ लोहे का ढांचा बनकर रह गया हैं।" नगर परिषद सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित है। असली ज़रूरत के वक्त ये फव्वारे कोई राहत नहीं दे पा रहे हैं।
इस संबंध में आयुक्त बृजेश रॉय से दो-तीन बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से फोन ही नहीं उठाया गया।
Published on:
22 May 2025 03:59 pm

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