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Rajsamand News : श्रीनाथजी की नगरी में 31 वर्ष बाद पधारे प्रभु श्री द्वारकाधीश…पढ़े पूरा मामला

कांकरोली स्थित तृतीय पीठ के मुख्य मंदिर से द्वारकाधीश के प्रतीक स्वरूप तीन दिवसीय उत्सव के तहत नाथद्वारा में जीर्णोद्धार मंदिर में लाए गए। द्वारकाधीश नाथद्वारा स्थित अपने जीर्णोद्धार मंदिर में तीन दिन विराजेंगे। 28 फरवरी को पुन: कांकरोली मंदिर पधारेंगे।

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नाथद्वारा. वल्लभ संप्रदाय की तृतीय पीठ के प्रभु श्रीद्वारकाधीश 31 वर्ष बाद प्रभु श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा में स्थित मंदिर में पधारे। कांकरोली स्थित तृतीय पीठ के मुख्य मंदिर से द्वारकाधीश के प्रतीक स्वरूप तीन दिवसीय उत्सव के तहत नाथद्वारा में जीर्णोद्धार मंदिर में लाए गए। द्वारकाधीश के पधारने के साथ ही मंदिर परिसर प्रभु के जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन कर आनंद की अनुभूति की। द्वारकाधीश नाथद्वारा स्थित अपने जीर्णोद्धार मंदिर में तीन दिन विराजेंगे। 28 फरवरी को पुन: कांकरोली मंदिर पधारेंगे। इससे पूर्व द्वारकाधीश प्रभु को लेकर आए तृतीय पीठ कांकरोली के गोस्वामी वागीश कुमार ने चौपाटी-मंदिर मार्ग पर पहुंचते ही वल्लभ संप्रदाय के प्रथम पीठाधीश्वर देशभर में करोड़ों भक्तों की आस्था के प्रभु श्रीनाथजी को दंडवत प्रणाम किया और प्रभु से मंगलकामनाएं की।

भोर में हुए मंगला दर्शन, दिनभर भक्तों का तांता

प्रभु द्वारकाधीश महाशिवरात्रि के अवसर पर कांकरोली से नाथद्वारा पधारे। जीर्णोद्धार मंदिर में विराजने के बाद सुबह 7 बजे मंगला दर्शन के साथ ही सेवा शुरू हुई। बड़ी संख्या में वैष्णव भक्तों, स्थानीय श्रद्धालुओं ने प्रभु के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। दर्शन के लिए मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। परिसर में अधिक तादात होने पर कतारबद्ध खड़े श्रद्धालु द्वारकाधीश प्रभु का जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे और दिव्य दर्शन कर आनंद में डूबे।

राजभोग झांकी के अलौकिक दर्शन

मंगला दर्शन के पश्चात साढ़े ग्यारह बजे राजभोग झांकी के अलौकिक दर्शन हुए। द्वारकाधीश को केसरी कुल्हे तापे, केसरी चाकदार वागा, सुथन, हरे ठाडे वस्त्र और स्वर्ण आभूषणों से विभूषित किया गया। प्रभु के अद्भुत श्रृंगार व अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर भक्त भाव-विभोर हो गए। ठाकुरजी को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग अरोगाया गया। मंदिर और नगर को भी रंग-बिरंगी लाइटों और पुष्पहारों से सजाया गया।

बांसुरी की मधुर धुन पर झूमे भक्त

द्वारकाधीश बैंड की ओर से प्रस्तुत बांसुरी की मधुर धुनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्तों ने इस अद्भुत संगीतमयी प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया और भक्ति-रस में डूबकर झूमने लगे। कीर्तन और आरती से मंदिर परिसर गूंज उठा। कीर्तनकारों ने अपनी मधुर वाणी से ठाकुरजी को रिझाने का प्रयास किया। कांकरोली तृतीय पीठाधीश गोस्वामी वागीश कुमार, गोस्वामी वेदांत कुमार, गोस्वामी सिद्धांत कुमार सहित अन्य आचार्यों ने प्रभु की आरती उतारी और भक्तों को समाधान प्रदान किया।

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