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‘जब-जब भी कोई बात चलेगी शौर्य धरा सम्मान की, सबसे पहले चर्चा होगी मेवाड़ के स्वाभिमान की..’

राजस्थान पत्रिका, उदयपुर संस्करण के 42वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सजी काव्य गोष्ठी  

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राजसमंद. राजस्थान पत्रिका, उदयपुर संस्करण के 42वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे मेवाड़ महोत्सव की शृंखला तीसरे दिन शुक्रवार देर शाम कांकरोली की गोपालकृष्ण वाटिका में काव्य गोष्ठी मंच की ओर से काव्य निशा सजी। शहर व जिले के रचनाकारों ने उम्दा प्रस्तुतियों से मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और परम्पराओं का बखान किया।
गोष्ठी में कवि गोपाल शर्मा ने महाराणा अमर सिंह व मान सिंह संवाद पर रचित 'पढऩे बैठा रामराज की, दुर्लभ एक कहानी को, सूर्य वंश के नायक की, गौरव गान जवानी को...Ó कविता पेश की। संदीप सामसुखा ने 'हे पुण्य धरा हे आराध्या ही वात्सल्यी कल्याणमयी, कोटि कंठ नित्य वंदन करते ही शक्ति रूप ज्योतिर्मयीÓ, लेखराज मीणा 'मुराडय़ा' ने 'दीपदान वाली ये रात मां इतनी काली काली क्यों है, बड़ी घबराहट सी हो रही, नींद आती क्यों नहीं हैÓ, नरेन्द्र सिंह रावल ने पन्ना-चंदन संवाद विषयक रचना माता म्हाने क्यूं कटवायो रे..., युवा कवि गौरव पालीवाल ने 'घर वो स्वर्ग समान है, जिस घर बंधती गाय, रोग दोष सब दूर हो, सुख-समृद्धि घर आयÓ, कवि योगेन्द्र "यश" ने 'रण में भेजो मुझको भी मैं तत्पर बैठा राणाजी, मुझको भी तो रण में जाकर अपना शौर्य दिखाना जी...Ó पंक्तियां पेश की।
सतीश आचार्य ने वीर रस से ओतप्रोत रचना 'वीरता का स्वर्ग इस धरती पे है कहीं तो सच कहूं यारों वो अपना मेवाड़ है, राणा सांगा, राणा पूंजा, राणा प्रताप हुए, चंदन पन्ना की कर्मभूमि ये मेवाड़ है, झाला, मन्ना, जयमल, पत्ता, भामाशाह यहां हुए, मीरा दुर्गावती की रे भूमि ये मेवाड़ है, चेतक की टप-टप जोहर की ज्वाल यहां, राष्ट्रप्रेमियों की तीर्थ भूमि ये मेवाड़ है...Ó प्रस्तुत कर पुण्यधरा के गौरव का अहसास किया।
प्रमोद सनाढ्य ने 'जब-जब भी कोई बात चलेगी शौर्य धरा सम्मान की, सबसे पहले चर्चा होगी मेवाड़ के स्वाभिमान की, रणवीरों की वीर धरा ये आन-बान और शान की, हल्दीघाटी की माटी है चेतक अश्व महान कीÓ रचना पेश कर वीर धरा की महिला रेखांकित की।
संचालन करते हुए सूर्यप्रकाश दीक्षित ने 'मेवाड़ धरा का हर चेहरा प्रताप सा नजर आता है, मातृभूमि का ये टुकड़ा विश्व को स्वाभिमान सीखाता हैÓ कविता प्रस्तुत की।
राहुल दीक्षित ने 'मेवाड़ धरा पर जन्म हुआ मैं सौभाग्यशाली कहलाता हूं, वीर शौर्य की भूमि है ये मेरी, मैं गीत यहां के गाता हूं...Ó प्रकाश जांगिड़ ने 'मैं चेतक की टापों से गुंजित, उस झनकार को लाया हूं, मैं शौर्यधरा हल्दीघाटी वाले उस मेवाड़ से आया हूंÓ, जितेंद्र पालीवाल ने 'हल्दीघाटी की माटी संग, अमर सदा कहलाएगा, चेतक तेरे स्वाभिमान को, जर्रा-जर्रा गाएगाÓ, राजकुमार शर्मा ने 'कलम मोहब्बत की चल जाए तो अच्छा, तस्वीर दुनिया की बदल जाए तो अच्छा...Ó, गजलकार शेख़ मुहम्मद हनीफ़ रज़वी (काकंरोलवी) ने 'गज़़ल चक्कर में पड़े रहते हैं मक्कार के पीछे, हम क्यूं नहीं जाते हैं समझदार के पीछे...Ó ज्योत्सना पोखरना ने 'मेवाड़ धरा के वीर सपूतों का यशगान सुनाएं, उनकी गाथा के गौरव से हम प्रेरित हो पाएंÓ, नरेंद्र 'निर्मलÓ ने 'जो गजल पढूंगा उसकी पहली पंक्ति है, चले थे गांव से और शहर तक आ गए...Ó नीतू बाफना ने जहां है पगड़ी का सम्मान, बचाता हर नारी की आन... करें हम इस माटी का बखानÓ, भावना लोहार ने 'शहीदों को शत-शत नमन मैं करूं, शहादत को उनकी मैं वंदन करूंÓ, चंद्रशेखर आजाद 'नारलाईÓ ने इतिहास के पन्नों पर अजर अमर है हल्दीघाटी, राणा प्रताप के अप्रतिम शौर्य की गाथा है हल्दीघाटी...Ó, धीरेन्द्र शर्मा 'शिल्पी' ने 'मीरां को गिरधर नागर मेरो भी कुछ और बनेगो मेरो नागर...Ó दर्शन पालीवाल ने 'औ मेरा तन मन से प्यारा वतन औ वतन...Ó नरेंद्र चंचल ने 'आजकल रिश्तेदारी अभी टेलीफोन हो गई है, सिक्के डालते रहिए हो सकता है कुछ मिनट बात हो जाए...Ó शेख अब्दुल हमीद ने 'दिल किसी का दुखाया नहीं, गम किसी को दिया तो नहीं...Ó जयचंद, शक्ति सिंह व्यक्ति थे, मगर उनकी कौम पृथ्वी-प्रताप को देखो, इतिहास गवाह है बुरी नहीं...Ó मनमोहन पालीवाल ने 'अपने दिल की बात बतादो गीत नया तुम हमें सुना दोÓ, जितेंद्र शर्मा ने 'ऐ शहीद तेरी याद बहुत आएगी...Ó रचना पढ़ी। हेमेंद्र सिंह चौहान ने 'नेताजी की भैंस मेरे शहीदों का सम्मान खा गईÓ रचना सुनाई तो हंसी के फव्वारे छूटे। कार्यक्रम में कलमकार दिनेश श्रीमाली भी उपस्थित थे।

'पत्रिकाÓ का काव्यात्मक अभिनंदन
कवि व हास्य प्रस्तोता सुनील व्यास ने अखबार हर श्वास का आस होता है.. चम्पक, चंदा-मामा पराग सा आभास होता है, ये अखबार अखबार नहीं पत्रिका का अहसास होता है...Ó पंक्तियां पढ़ीं, वहीं रामगोपाल आचार्य ने 'जिसका सच से सरोकार है, लोगों को उसी पर ऐतबार है, 42 वर्षों से भरोसेमन्द, राजस्थान पत्रिका, उदयपुर का अखबार है...Ó रचना पेश की।

नाथद्वारा में कुश्ती दंगल आज
नाथद्वारा. राजस्थान पत्रिका उदयपुर के ४२वें स्थापना दिवस पर चल रहे पत्रिका मेवाड़ महोत्सव के अन्तर्गत शनिवार शाम ५ बजे शहर के दामोदरलाल महाराज स्टेडियम में स्थित श्रीकृष्ण व्यायामशाला में कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाएगा। व्यायामशाला के मनीष गुर्जर ने बताया कि शाम ५ बजे विभिन्न भार वर्ग की कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर तैयारियां कर ली गई है।

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