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‘डरा-धमका खाली पेज दिया, दस्तखत से किया इनकार तो दोबारा लाए प्रार्थना-पत्र में लिख दिया पैसा विदाई और वार्षिकोत्सव काÓ

स्कूल प्रशासन और जांच कमेटी पर ही छात्रों ने उठाए सवाल, प्रैक्टिकल के नाम पर पैसा वसूलने के मामले की जांच के दौरान छात्रों पर डाला दबाव

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राजसमंद. शहर के धोइन्दा क्षेत्र स्थित निजी स्कूल में प्रैक्टिकल के नाम पर हरेक विषय के पांच-पांच सौ रुपए वसूलने के मामले की जिला कलक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग द्वारा गठित जांच कमेटी व स्कूल प्रशासन पर ही छात्रों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार को स्कूल से जांच कमेटी जाने के बाद विद्यार्थियों ने पत्रिका को बताया कि विद्यालय प्रशासन के लोगों ने उन्हें डराया, धमकाया और उन्हें प्रैक्टिकल की बजाय वार्षिकोत्सव और विदाई समारोह के नाम पर पैसा लेने की पहले से लिखी हुई इबारत पर दबाव डालकर दस्तखत करवाए गए। कई विद्यार्थी स्कूल ही नहीं गए। इधर, जांच कमेटी ने अभी जांच पूरी नहीं होने की बात कही है। सम्भवत: शुक्रवार को जांच पूरी कर सीडीईओ को सौंपी जाएगी, जिसके बाद जिला कलक्टर को प्रेषित होगी।
स्कूल में डरे-सहमे रहे विद्यार्थियों ने बाहर आने के बाद बताया कि जांच कमेटी के तीन में से केवल एक सदस्य ने ही उनसे बात की। दो सदस्य वापस बाहर की ओर चले गए थे। स्कूल प्रशासन ने कमेटी के आने से पहले ही तमाम बातें समझा दी गई थीं और वैसा ही करने को कहा गया। दोबारा प्रैक्टिकल कराने, पूरे नम्बर नहीं देने, दूसरे स्कूल में प्रायोगिक परीक्षा कराने जैसी बातों की चेतावनी व धमकी देते हुए साइन करने के लिए दबाव डाला गया।

छात्र-1
कल (बुधवार) को सर कक्षा में आए। उन्होंने कहा कि कल (गुरुवार) को एक प्रार्थना-पत्र पर साइन करवाएंगे, उसमें लिखा होगा कि 500-500 रुपए प्रैक्टिकल के लिए नहीं, बल्कि विदाई समारोह और वार्षिकोत्सव के लिए जमा किए हैं। सर ने सबको फोर्स किया था, जबरदस्ती साइन करवाए। साइन नहीं किए तो नम्बर नहीं भेजेंगे। बाकी प्रैक्टिकल की परीक्षा वापस होगी, फिर से फाइलें बनानी पड़ेंगी और दूसरे स्कूल में परीक्षा होगी। दुबारा नम्बर बहुत कम आएंगे। जांच कमेटी आने से पहले ही सर ने बता दिया था कि पांच प्रश्न होंगे, जिनमें से तीन का जवाब देना है। हमने पैसा नहीं लेने का उत्तर लिखा।

छात्र-2
प्रिंसिपल और वे सब लोग आए। हमें कहा कि आपको कागज दे रहे हैं, उस पर दस्तखत कर दो। हम सबने मना कर दिया। वे खाली पेज लेकर आए थे। थोड़ी देर बार वे एप्लीकेशन लेकर आए, जिसमें लिखा था कि यह पैसा हमने विदाई समारोह वास्ते लिए। बच्चों ने दस्तखत नहीं किए, तो दबाव डाला कि ऐसा नहीं करने पर किसी एक नहीं, सभी विषय में 20-20 नम्बर जाते हैं, वे नम्बर फिर अद्र्धवार्षिक के हिसाब से ही देंगे। दबाव डालकर दस्तखत करवा लिए। जांच करने जो आए, उससे पहले ही हमें बता दिया था कि ये पांच सवाल पूछे जाएंगे, उनके उत्तर कैसे देने हैं।

छात्र-3
मैं सुभाष स्कूल में पढ़ता हूं। प्रैक्टिल के पांच-पांच सौ रुपए कुछ दिन पहले मांगे थे। हमने पूछा कि क्यों ले रहे हैं पैसे तो बोले कि लेने-देन पड़ते हैं, खर्चा करना पड़ता है। तुम्हारे नम्बर अच्छे भेजेंगे। पूरा प्रयास रहेगा। स्कूल वाले हमें धमका भी रहे थे कि कल पैसे लेकर आ जाना। मैंने अगले दिन उस दिन जाकर पैसे जमा करवा दिए। उसके बाद दो दिन से मैं स्कूल नहीं गया हूं।

छात्र-4
मैं सुभाष स्कूल की 12वीं कक्षा का छात्र हूं। अखबार में आने के बाद हमारे स्कूल में माहौल ऐसा था कि सर हमें डरा रहे थे। उन्होंने बताया कि हमने प्रैक्टिकल के जो पैसे लिए, उनसे ऐसा बोलना कि विदाई के लिए पांच-पांच सौ रुपए इकट्ठे किए। फिर खाली पेज थे, इसलिए हमने साइन नहीं किए। फिर एक पहले से लिखी हुई एप्लीकेशन लेकर आए, जिसमें लिखा था कि हमसे जो पैसे लिए, वह प्रैक्टिकल के लिए नहीं, बल्कि विदाई समारोह के लिए थे। जांच के लिए दो लोग आए, उनमें से भी एक बाहर चले गए। हमें पांच प्रश्न दिए थे, उनके बताए अनुसार सारे उत्तर भर दिए।

ये थे पांच में से तीन सवाल
1. पहला कौन से विषय का पै्रक्टिकल हुआ
2. दूसरे में तारीख
3. पैसे लिए थे या नहीं, हां या ना में जवाब का विकल्प
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हमने बच्चों को कोई सवाल नहीं दिए। जांच कमेटी आई थी, उन्हीं ने अपने हिसाब से जांच की है। पिछले साल विदाई समारोह या वार्षिकोत्सव का पैसा लिया या नहीं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
लक्ष्मीलाल श्रीमाली, व्यवस्थापक, सुभाष पब्लिक

दो दिन जांच की। करीब 84 विद्यार्थियों से बात की है। रिपोर्ट सोमवार तक पेश करेंगे। कमेटी के सामने कुछ नहीं हुआ। पहले से यदि उन्हें कुछ बताया हो, तो मुझे नहीं मालूम। बच्चे स्वतंत्र हैं अपनी बात रखने के लिए।
भानू कुमार वैष्णव, संयोजक, जांच कमेटी

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