
भीम. करीब डेढ़ दशक बाद कस्बे को हाल ही के राज्य बजट में आखिरकार गहलोत सरकार ने नगरपालिका का दर्जा दे दिया। इसके साथ ही अब पालिका के गठन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यह जिले की चौथी नगरपालिका व पांचवां नगरनिकाय होगा। राजसमंद नगर परिषद के अलावा नाथद्वारा, आमेट व देवगढ़ में पालिका संचालित हैं।
सूत्रों ने बताया कि वर्तमान सरपंच को ही उनका कार्यकाल पूरा होने तक चेयरमैन व उपसरपंच को उपाध्यक्ष का दर्जा मिल जाएगा। वर्तमान में भीम ग्राम पंचायत में 27 वार्ड हैं। सभी वार्डपंचों को पार्षद बनाया जाएगा। करीब 25 वार्डों का गठन होने की सम्भावना है। नगरपालिका में एक अधिशासी अधिकारी का पद सृजित किया जाएगा, वहीं कार्यालय स्टॉफ, जेईएन व अन्य तकनीकी अधिकारियों के पद भी मिलेंगे। नगरपालिका क्षेत्र में 30 से 35 तक सफाईकर्मियों के पद भी स्वीकृत होंगे।
- अब नहीं छिनेगा रोजगार
शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू होने से पूर्व तक भीम ग्राम पंचायत को नगरपालिका का दर्जा मिलने की स्थिति में लोगों को रोजगार छिनने का डर था, लेकिन अब शहर में भीरोजगार गारंटी योजना संचालित होने से लोगों को इसका लाभ मिलता रहेगा। केवल ग्रामीण मनरेगा योजना की जगह मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना चालू हो जाएगी। इसमें न्यूनतम 100 दिन का रोजगार मिलेगा।
- बजट बढ़ेगा, व्यवस्थाएं सुधरेंगी
नगरपालिका का बजट ग्राम पंचायत के बजट से ज्यादा होगा। नगरपालिका के आय के स्रोतों में भी वृद्धि होने लगेगी। नगरपालिका का फण्ड बढ़ता जाएगा। भीम में पिछले 50 सालों से जारी सफाई की बदइंतजामी, टूटी सड़कें, नालियों की व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और कई तरह की मूलभूत सुविधाओं का विकास होगा। मनरेगा में सफाई, सौंदर्यीकरण जैसे कार्य भी श्रमिक कर पाएंगे।
- 25 वार्ड बनेंगे
अधिसूचना जारी होने के साथ ही पंचायत को नगरपालिका का दर्जा मिल जाएगा। वर्तमान में पंचायत में 27 वार्ड हैं, जिनके परिसीमन से करीब 25 वार्ड बनाए जाएंगे। सभी वार्डपंच पार्षद का दर्जा हासिल करेंगे। वर्तमान में ग्राम पंचायत भवन में ही पालिका चलेगी। नए भवन निर्माण के लिए करीब 4 से 5 करोड़ रुपए राज्य सरकार से मिलेंगे। एक अग्निशमन वाहन, कचरा संग्रहण वाहन भी मिलेंगे। प्रत्येक वार्ड में 400 से 500 मतदाता होंगे।
- जहां दो पंचायतों का विलय, वहां ऐसी व्यवस्था
स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक जो नगर पालिकाएं एक या उससे ज्यादा ग्राम पंचायतें मिलाकर बनाई गई हों, उनमें नगर पालिका का अध्यक्ष वही होगा, जिस ग्राम पंचायत की जनसंख्या ज्यादा होगी। उस पंचायत का सरपंच ही नई नगर पालिका का अध्यक्ष होगा। नगर पालिका में शामिल वह ग्राम पंचायत जो जनसंख्या के नजरिए से दूसरे स्थान पर है, उसका सरपंच नगर पालिका का उपाध्यक्ष होगा, लेकिन भीम में ऐसी स्थिति बनती नजर नहीं आ रही है।
10 साल में भीम से अलग हुईं 2 ग्राम पंचायतें
भीम इतना बड़ा कस्बा है कि इस ग्राम पंचायत से अलग होकर पिछले 10 वर्षों में 2 ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन हुआ। वर्ष 2015 में भीम से डूंगाजी का गांव ग्राम पंचायत तथा वर्ष 2020 में भीम से बालोतों की गुआर ग्राम पंचायत का गठन किया गया।
- अभी 1 साल में 90 लाख का बजट
ग्राम विकास अधिकारी महेंद्र कुमार भांवरिया ने बताया कि भीम पंचायत के 27 वार्डों में से प्रत्येक में करीब 300 से 400 मतदाता हैं। कचरा संग्रहण के लिए एक ट्रैक्टर एवं चार छोटी ट्रोलियां हैं। पंचायत के अधिन 25 अस्थाई सफाई कर्मचारी हैं, जो 20,000 की आबादी में साफ-सफाई की व्यवस्था सम्भालते हैं। केंद्र व राज्य वित्त आयोग से 1 वर्ष में करीब 90 लाख रुपए का बजट मिलता है, जो सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था, साफ -सफाई, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, कचरा संग्रहण एवं परिवहन आदि पर खर्च होता है।
फैक्ट फाइल...
20 हज़ार या उससे अधिक जनसंख्या वाले कस्बे को नगरपालिका का दर्जा दिया जा सकता है
5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरी निकाय को नगर निगम बनाया जाता है
इनका कहना है...
मुझे पूरी उम्मीद है कि आगामी 31 मार्च से पहले राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर भीम ग्राम पंचायत में नगर पालिका का गठन कर देगी। मेरे प्रयासों को तरजीह देकर भीम के लिए गहलोत सरकार ने ऐतिहासिक घोषणा की है।
सुदर्शन सिंह रावत, विधायक, भीम
मैं चाहता तो 10 वर्ष पूर्व ही बनवा लेता
भीम ग्रामीण परिवेश में है। गरीब जनता प्रभावित नहीं हो, यह देखना जरूरी था। मनरेगा योजना शहरी क्षेत्र में तब नहीं थी। ग्रामीण जनता के रोजगार, फुटकर व्यवसायियों, छोटे व्यापारी, सब्जी विक्रेताओं को समस्या न हो, इसको ध्यान में रखते हुए मैंने पालिका बनवाने में रुचि नहीं दिखाई।
हरिसिंह रावत, पूर्व विधायक, भीम
Published on:
25 Feb 2023 11:47 am

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