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कांकरोली द्वारकाधीश मंदिर के पीठाधीश की देह पंचतत्व में विलीन

- पिछले छह महीने से चल रहे थे बीमार, बड़ौदा के एक अस्पताल में ली थी अंतिम सांस

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राजसमंद. पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की तृतीय पीठ कांकरोली स्थित श्री द्वारिकाधीश मंदिर के पीठाधीश गोस्वामी बृजेश कुमार का 83 साल की उम्र में देवलोकगमन हो गया। उन्होंने सोमवार सुबह 11.38 बजे बड़ौदा के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और देशभर के समूचे वल्लभ संप्रदाय में शोक की लहर दौड़ गई।
सोमवार शाम 4:30 बजे गोस्वामी बृजेश कुमार का बड़ौदा में परंपरागत ढंग से अंतिम संस्कार हुआ। लोग उनके अंतिम दर्शन को उमड़ पड़े। बड़ौदा के केवड़ाबाग स्थित बैठक मंदिर से निकली अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। करीब तीन किलोमीटर लम्बा हुजूम था। जगह-लोगों ने पुष्पवर्षा की।
मुखाग्नि ज्येष्ठ पुत्र डॉ. वागीश बावा ने दी। इस उनके छोटे भाई द्वारकेशलाल, पीठाधीश के भाई परगकुमार शिशिर कुमार, भतीजे नेमिष कुमार, पौत्र वेदांत कुमार, सिद्धांत कुमार, आश्रय कुमार एवं संजीव कुमार, मंदिर अधिकारी भगवतीलाल पालीवाल, मुख्य सलाहकार पद्मेश तैलंग, ट्रस्टी मुकेश भाई मेहता, सहायक अधिकारी गणेशलाल सांचीहर, समाधानी राजकुमार गौरवा, मंदिर पुरोहित, पंडित बिंदूलाल शर्मा भी उपस्थित थे।
द्वारकाधीश मंदिर के कार्यवाहक अधिकारी विनीत सनाढ्य ने बताया कि गोस्वामी बृजेश कुमार पिछले छह माह से बीमार चल रहे थे और पिछले 15 दिन से तबीयत ज्यादा खराब होने से उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। पिछले तीन दिन से वेंटीलेटर पर उनकी हालत स्थिर थी। उनके निधन का समाचार सुनकर राजसमंद सहित अन्य जगहों से उनके अनुयायी, श्रद्धालु बड़ौदा पहुंचे। कांकरोली मंदिर से पहुंचे द्वारकेश बैंड ने उनकी अंतिम यात्रा में शोकोत्सव की धुन बजाई। गोस्वामी बृजेश कुमार 42 साल पहले 14वें पीठाधीश बने थे, जब उनके पिता बृजभूषणलाल का देवलोकगमन हुआ था। तृतीय गृहस्वामी बृजेश कुमार के परिवार में उनके बड़े पुत्र वागीश बावा व छोटे पुत्र द्वारकेश बावा तथा दो पुत्रियां सुचित्रा व भावना हैं।

- कृपालु, संवेदनशील और साहित्यानुरागी थे
गोस्वामी बृजेश कुमार का जन्म 20 जनवरी, 1940 को हुआ। शिक्षाविद् दिनेश श्रीमाली बताते हैं कि मेवाड़ शासन में उस वक्त कांकरोली और नाथद्वारा कस्बे स्वायत्तशासी ठिकाने थे। प्रशासन के समस्त अधिकार पीठाधीश में निहित थे। उसी का सदुपयोग करते हुए कांकरोली ठिकाने के गोस्वामी बृजभूषणलाल महाराज ने जनहित में कई निर्णय किए। बृजेश कुमार भी अपने जीवन में पिता की तरह कृपालु, संवेदनशील,कलाप्रिय और विद्वान आचार्य रहे। वह वल्लभकुल के श्रेष्ठतम आचार्य माने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक कौशल, विवेकयुक्त अध्यात्म दृष्टि के चलते समयानुसार श्रेष्ठ परंपरा का अनुगमन किया और नवाचारों को स्वीकार किया। कांकरोली की द्वारकेश गोशाला, वि_लविलास बाग जीर्णोद्धार, नागपुर, बोडेली, हालोल, अलकापुरी (बड़ौदा), छोटा मंदिर उदयपुर और सुखधाम (बड़ौदा) में मंदिर निर्माण करवाया। इसी प्रकार करीब एक दर्जन से अधिक मंदिरों का गुजरात, राजस्थान और बृज में जीर्णोद्धार किया गया। कांकरोली मंदिर में बैण्ड, विद्यालय संचालन, शिक्षक सम्मान के अलावा बड़ौदा में श्रीवल्लभ पीठ विश्वविद्यालय की स्थापना विशेष उल्लेखनीय है। पीठाधीश ब्रजेश कुमार ने भक्ति योग, साधन दीपिका, द्वारकेश अष्टकम, कल्याण राय अष्टकम, श्रीनाथ विज्ञप्तयष्टकम, श्रीचरणाष्टकम समेत कई पुस्तकों का लेखन किया। अमरीका के न्यू जर्सी में श्रीद्वारिकाधीश मंदिर की स्थापना कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तृतीय पीठ के सम्मान को नई दिशा दी।

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