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हिन्दुस्तान के बादशाह इस मंदिर में प्रभु की सीढिय़ों को बुहारते हैं अपनी दाढ़ी से

राजस्थान केप्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर में होली पर निभाई जाती है अनूठी परम्परा, ग्वाल-बाल खूब देते हैं गालियां  

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नाथद्वारा. श्रीनाथजी मंदिर की परंपरानुसार धूलण्डी पर बादशाह की सवारी निकाली गई। बादशाह ने मंदिर के सूरजपोल पहुंच वहां की सीढिय़ों को अपनी दाढ़ी से बुहारा।
शहर के गुर्जरपुरा मोहल्ले में स्थित बादशाह गली से बादशाह की सवारी देर शाम को रवाना हुई। इसमें बादशाह बने हेमंत गुर्जर पालकी में सवार होकर ठाकुरजी की छवि हाथ में लिये हुए थे। पीछे उन पर चंवर डुलाये जा रहे थे। सवारी पिंजारा घाटी, बड़ा बाजार, कठेड़ा वाली चौकी, मंदिर पिछवाड़े से प्रीतमपोल, नया बाजार होकर मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार नक्कारखाना से गोवर्धन पूजा चौक पहुंची। वहां पर बादशाह ने सूरजपोल के दरवाजे पर पहुंच पहले ठाकुरजी को प्रणाम किया और बाद में अपनी दाढ़ी से नवधा भक्ति से बनी सूरजपोल की सीढिय़ों को बुहाराते हुए सदियों से चली आ रही परंपरा का निवर्हन किया। सवारी में शामिल ग्वाल-बाल बादशाह को इस दौरान खूब गालियां (गार) भी दी। वहीं, गार के साथ रसिया का गान भी किया। सवारी को देखने गुर्जरपुरा से सभी मार्गों में लोग जमा थे। बादशाह की सवारी में घोड़े आदि भी शामिल थे, जो मंदिर के बैण्ड के साथ चल रहे थे। बादशाह के द्वारा सीढिय़ों को बुहारने के बाद मंदिर की ओर से उसे नेग भी दिया गया। इसके बाद बादशाह पुन: पालकी पर सवार होकर मंदिर मार्ग से चौपाटी, मोतीमहल नीचे होकर बादशाह के घर पर पहुंचे। यहां सभी को पकौड़ी का नाश्ता कराया गया।
गौरतलब है कि मुगल बादशाह के श्रीनाथजी मंदिर में लूट की नीयत से प्रवेश पर उनकी आंखों के आगे अंधेरा छा जाने, बाद में प्रभु से दृष्टि लौटाने की मिन्नत करने के बाद फिर से सबकुछ ठीक होने जाने की किंवदंती खूब प्रचलित है। उसी को केन्द्र में रखते हुए यह परम्परा निभाई जा रही है, जिसमें वह घटनाक्रम मंचित किया जाता है।
द्वितीया पाट आज, गुलाब की मंडली धराई जाएगी
प्रभु श्रीनाथजी को डोलोत्सव के समापन के साथ ही गुरुवार को द्वितीया पाट के अवसर पर विशेष शृंगार धराया जाएगा। साथ ही राजभोग की झांकी के समय चैत्री गुलाब के फूलों की मंडली की सेवा धराई जाएगी।

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