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‘पहले सितारों का दौर था, अब दर्शक कहानी और किरदार देखने आते हैं’

बॉलीवुड फिल्म'पचहत्तर का छोरा' फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर आशीष शर्मा से बातचीत  

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राजसमंद. पहले फिल्में हीरो-हिरोइन के इर्द-गिर्द घूमा करती थीं। किसी भी फिल्म का आकर्षण अभिनेता हुआ करते थे, लेकिन अब दर्शक कहानी और किरदार भी देखने आ रहे हैं। यह कहना है अभिनेता और बॉलीवुड फिल्म 'पचहत्तर का छोराÓ के स्क्रिप्ट राइटर आशीष शर्मा का।
उन्होंने पत्रिका से बातचीत में कहा कि अब फिल्म का सफल होना, न होना कहानी पर निर्भर करता है। अच्छी कहानियों को दर्शक पसंद करते हैं, किरदार देखते हैं। लम्बे समय से फिल्म उद्योग स्टार और स्टारडम पर निर्भर था। इसमें बदलाव आया है। दर्शक अच्छी कहानी देखना चाहते हैं। बायोपिक के बढ़ते चलन पर उन्होंने कहा कि लेखक व निर्देशक पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि ऐतिहासिक तथ्यों के साथ मनोरंजक फिल्में बनाएं। सत्य घटनाओ की प्रस्तुति रोचक हो सकती है, लेकिन काल्पनिक नहीं। इतिहास पर आधारित और आत्मकथाओं पर केन्द्रित फिल्मों पर अनुसंधान गहरा होना चाहिए। हकीकत व मनोरंजन में फासला ज्यादा न हो। इतिहास और साहित्य को पसंद किया जाता है, इसलिए लेखक की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने राजस्थानी पृष्ठभूमि की फिल्मों व धारावाहिकों के सवाल पर कहा कि बॉलीवुड से यहां का गहरा नाता है। एक और सवाल के जवाब में आशीष ने कहा कि महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, बाजीराव पेशवा और सम्राट अशोक के अलावा हमारे इतिहास में कई ऐसे महापुरुष हैं, जिनके बारे में आम लोग वह नहीं जानते, जो उन्हें जानना चाहिए। जो पाठ्यक्रमों में पढ़ाया गया, वहीं जाना जाता है।

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