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21 साल का मास्टरमाइण्ड है लक्की: 19 से 24 साल के बेरोजगारों को भर्ती किया, लोगों को कैसे फांसना है, इसकी भी ट्रेनिंग दी

देवास में बैठकर राजसमंद में साबइर ठगी, डेमो वेबसाइट पर भी पूरी तरह रखता था नियंत्रण  

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राजसमंद. जिले की नवगठित साइबर थाना पुलिस ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश के देवास से संचालित फर्जी कॉल सेंटर का भण्डाफोड़ किया है। गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन जब्त किए। ई-मित्र संचालकों के साथ ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर यह गिरोह लोगों से अब तक करीब एक करोड़ रुपए ठग चुका है।
इस गिरोह का मास्टर माइन्ड लक्की जायसवाल है। वह अपने फर्जी कॉल सेन्टर में काम करने के लिए गांव के आस-पास के बेरोजगार युवकों की तलाश कर भर्ती करता है। उसके गिरोह में सबसे ज्यादा उम्र का आरोपी भी केवल 24 साल का ही है। जायसवाल ने 'आई फोरेक्स ट्रेडÓ नामक फर्जी डेमो वेबसाइट बनवा रखी है। इसमें विदेशी शेयर मार्केट में लेन-देन के उतार-चढ़ाव को दर्शाता रहता था। इसका नियंत्रण वही करता था। कब, कितना लाभ दिखाना है, कितना नुकसान दिखाना है, वह खुद तय करने करता था। दूसरे साथियों के जरिए कॉलिंग करवाकर लोगों के नाम, मोबाइल नम्बर व ई-मेल आईडी जैसे डेटा इकट्ठा करता रहा। डेटा सभी लड़कों को अलग-अलग देता है।

बात करने की भी दी ट्रेनिंग
विदेशी बाजार में निवेश कैसे करना है, ग्राहक को पैसा क्या और कैसे बोलना है, लक्की इसकी पूरी ट्रेनिंग साथियों को देता था। वह कागज पर छपी हुई सूची देता था। पैसा लगाने के इच्छुक सदस्य लक्की से बात करवाते थे। थोड़ी अंग्रेजी व कुछ हिन्दी मिश्रित भाषा में बोलकर खुद के निवेश कारोबार का एक्सपर्ट होने का झांसा देता था। पैसा फोरेक्स डेमो वेबसाइट से लिंक के जरिए बैंक खाते में पैसा जमा करवाता था। पैसा खाते में जमा होते ही एटीएम से निकाल लेता था। जमा पैसों का लाभांश बढ़ाकर वेबसाइट पर दर्शाता था, जिससे ग्राहक और ज्यादा भरोसे के साथ नया निवेश करते। ठगी का शिकार व्यक्ति पैसा निकालने को कहते, तो मास्टरमाइण्ड उससे बड़े लॉट साइज में पैसा निवेश के लिए प्रेरित करता।

मोटी राशि नहीं होने पर लोन का भी झांसा
बड़ी राशि ग्राहक के पास नहीं होने पर वह डेमो वबसाइट पर ही ग्राहक की आइडी पर लोन की मोटी रकम शो करवा देता। लालच में आए फरियादी को लोन का पैसा विड्रॉल करने के बदले भी पैसे मांगे जाते। मोटी रकम निकालने के फेर में ठगी का शिकार लोग कुछ पैसा और जमा करवा देते। पैसा निकालने के लिए जमा राशि की करीब 30 प्रतिशत जीएसटी दर लागू होने का नियम बताते। यह पैसा जमा नहीं करवाने पर ठग उस ग्राहक का फोन रिसीव करना बंद कर देते हैं, जब जाकर उसे ठगी का अहसास होता है। पता चला कि सिम कार्ड बंद करने तक हरेक व्यक्ति से ये लोग करीब ढाई से तीन लाख रुपए ठग चुके होते हैं। कोई ग्राहक ठगों के द्वारा तय लक्ष्य के आखिर तक पहुंच जाता, तब तक पांच से दस लाख रुपए तक की ठगी कर लेते हैं।

गिरफ्तार आरोपी
1. लक्की उर्फ लोकेश (21) पुत्र चेतन जायसवाल (कलाल) साल निवासी अकालिया, देवास (मध्यप्रदेश)
2. हरपालसिंह (21) पुत्र ईश्वरसिंह निवासी अकालिया, देवास
3. दिग्विजयसिंह उर्फ बन्टी (19) पुत्र धर्मेन्द्रसिंह निवासी अकालिया, देवास
4. हर्षित (19) पुत्र मुकेश मेवाड़ा निवासी मानपुरा, सिहोर
5. राहुलसिंह (21) पुत्र हेतमसिंह राजपूत निवासी जानपुर, सिहोर
6. रघु (19) पुत्र गोविन्द प्रजापत निवासी अकालिया, देवास
7. सतीश (24) सिंह पुत्र प्रहलादसिंह राजपूत निवासी रोला, सिहोर
8. सुरेन्द्रसिंह (21) पुत्र लादुसिंह राजपूत निवासी निपानिया, पिपलरावा, (देवास)

साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करने वाली टीम
बेनीप्रसाद मीणा, साइबर थाना प्रभारी, पुलिस निरीक्षक रमेश कविया, एएसआई पवन सिंह साइबर सेल प्रभारी, हेड कांस्टेबल नारायणलाल शर्मा, गोविन्द सिंह, सोहन सिंह व बद्रीलाल, कांस्टेबल इन्द्रचन्द चोयल, शिवदर्शन सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, सीता शर्मा, हरिमहेन्द्र, मिन्टु कुमार व तिलकेश कुमार।

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