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नाथद्वारा में प्रताप की पहली प्रतिमा : 14 फीट ऊंचाई, 3800 किलो वजन, डेढ़ करोड़ कीमत

चुनावी साल में इस लोकार्पण से लग रहे कयास, २३ को होगा अनावरण कार्यक्रम, मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य हो सकते हैं शामिल

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नाथद्वारा. शहर में बने प्रदेश के सबसे बड़े तीन किलोमीटर लम्बे गौरवपथ पर चुनावी वर्ष में मेवाड़ के शूरवीर शासक महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापना होने जा रही है। इसके कई राजनैतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। नाथद्वारा में इस वक्त लोकार्पण एवं शिलान्यास की बाढ़ सी आई हुई है, इस बीच महाराणा प्रताप की प्रतिमा के लोकार्पण का बड़ा कार्यक्रम भी खास होगा।
शहर को रिंग रोड से जोडऩे वाले धारचा पर बने गौरव पथ व बागोल के निकट तिराहे पर प्रताप की स्वामीभक्त अश्व चेटक पर आसीन १४ फीट ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण २३ मई की रात ८:४० बजे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी की मौजूदगी में होगा। प्रतिमा का आधार १२ फीट का बनाया है। ३८00 वजनी मूर्ति पर कुल १.५० करोड़ रुपए की लागत आई है।
सूत्रों की मानें तो कार्यक्रम में उदयपुर पूर्व राजपरिवार के लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ सहित प्रदेश के कुछ मंत्रियों के भी आने की संभावना है। आयोजन को बड़ा बनाने के लिए कई जनप्रतिनिधि जी-जान से जुटे हैं। पूरे नाथद्वारा उपखंड व विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों से लोग पहुंचेंगे। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक की जनता की भागीदारी तय करने पर जोर दिया जा रहा है। समारोह की पूरी तैयारियां नगरपालिका प्रशासन कर रहा है। पालिकाध्यक्ष मनीष राठी, उपाध्यक्ष श्यामलाल गुर्जर, नगर कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश एम. जोशी, पार्षद सुरेन्द्र सिंह राजपूत, पालिका के अधिकारी सहायक अभियंता सीएम कौशिक सहित अन्य कर्मचारियों ने मौके पर जायजा लिया। पार्षद सुरेन्द्र सिंह ने यहां मूर्ति स्थापना का प्रस्ताव दिया था, जो अब मूर्तरूप लेने जा रहा है।

कुंभलगढ़ की तरफ चेहरा, पीठ शहर की ओर?
यहां स्थापित प्रताप की मूर्ति का चेहरा उनकी जन्मस्थली कुंभलगढ़ की ओर रखा गया है, जबकि शहर की ओर पीठ रहेगी। मूर्ति के बायीं ओर हल्दीघाटी और दाई तरफ गौरवपथ रहेगा। कुछ लोगों का कहना है कि मूर्ति का फेस शहर की ओर भी किया जा सकता था।

जनसभा की तैयारियां
मूर्ति अनावरण के मौके पर जनसभा होगी। सर्कल के पास ही खाली पड़े क्षेत्र में बैठने का इंतजाम किया जा रहा है। निकट खेत में वाहनों की पार्किंग कराई जाएगी। सर्कल के आसपास के क्षेत्र में डामरीकरण नहीं होने से आनन-फानन में डामरीकरण कार्य भी किया जा रहा है।

सूख रहे पौधे
यहां सर्कल के अंदर लगाए पौधे अभी से सूखने लगे हैं। अनावरण से ठीक पहले सिंचाई कर इन्हें संवारने का जतन किया जा रहा है। पता चला है कि व्यवस्थाओं को लेकर क्षेत्र के बड़े नेता की फटकार के बाद अधिकारी भी मौके पर पहुंचेे व अधूरे कार्य को पूरा करवाने में जुटे रहे।