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राजसमंद ने चमकाकर भेजा था नए संसद भवन में लगा 1000 टन कलात्मक पत्थर

new parliament building कार्विंग बेंड, एल एंगल और ओक्टागोनल कॉलम हमारे यहां से भेजे गए, सेंड स्टोन और रेड स्टोन की प्रोसेसिंग धोइन्दा के रीको एरिया में हुई

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new parliament building राजसमंद. भारतीय संसद की नई इमारत में शहर के धोइन्दा स्थित रीको में तैयार हुए कलात्मक पत्थर भी लगाए गए हैं। यहां के गर्भ से निकला और तैयार हुआ पत्थर भी दिल्ली में दमक रहा है। यही नहीं, पत्थरों की नक्काशी का काम मेवाड़ के कारीगरों ने भी किया। जिले के देवगढ़ का ब्लैक मार्बल और केसरियाजी का ग्रीन मार्बल भी संसद भवन में लगा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों रविवार को उद्घाटित नए संसद भवन में देश के विभिन्न राज्यों से आई निर्माण सामग्री लगी है। सौंदर्यीकरण कार्य में विविध इलाकों के रंग दिखाई दे रहे हैं। इनमें राजसमंद और उदयपुर का भी योगदान है। यहां एक बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट का संचालन कर रहे राजेन्द्र सिंह बताते हैं कि नए संसद भवन में बाहरी ओर लगे सेंड स्टोन और रेड स्टोन के बड़ी तादाद में आर्टिकल्स धोइन्दा में तैयार करके भेजे गए हैं। कार्विंग बेंड, एल एंगल और ओक्टागोनल कॉलम करीब एक साल तक यहां तैयार हुए। देश के कई हिस्सों से यहां लाया गया कच्चा माल तैयार कर तकरीबन 100 गाडिय़ां भरकर दिल्ली भेजीं। हरेक गाड़ी में करीब 10 टन माल भरा गया।

केसरियाजी का ग्रीन मार्बल भी चमक रहा
संसद में केसरिया ग्रीन मार्बल से चमकता नजर आएगा। जिस केसरिया ग्रीन मार्बल का इस्तेमाल इस भवन में हुआ है, उसका खनन सिर्फ उदयपुर के ऋषभदेव क्षेत्र में ही होता है। यह ऋषभदेव क्षेत्र के अलावा कहीं भी नहीं पाया जाता। देश-दुनिया में इसकी खासी मांग रहती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि 160 करोड़ साल पहले के भूगर्भीय बदलाव से केसरिया ग्रीन मार्बल बना। देश-दुनिया में पहचान रखने वाला केसरिया ग्रीन मार्बल देश के कुल उत्पादन का 90 फीसदी खनन ऋषभदेव क्षेत्र में होता है। भूविज्ञानी बताते हैं कि जिसे ग्रीन मार्बल कहा जाता है, वह मार्बल नहीं है, बल्कि एक कायान्तरित शैल है, जिसको सर्पेटिनाइट कहा जाता है। बड़ी बात ये कि यह मार्बल की तरह कट जाता है और पॉलिश भी ले लेता है।

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