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राजस्थान के इस प्रसिद्ध पुष्टिमार्गीय मंदिर के पीठाधीश की कुर्सी पर फंसा पारिवारिक लड़ाई का पेंच

Dwarkadheesh mandir Kankroli वैष्णव सम्प्रदाय की तृतीय पीठ कांकरोली के द्वारकाधीश मंदिर के पीठाधीश की गादी तीन माह बाद भी खाली, गत 27 फरवरी को 83 साल की उम्र में हुआ था गोस्वामी बृजेश कुमार का निधन

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जितेन्द्र पालीवाल/राजसमंद. वैष्णव सम्प्रदाय की तृतीय पीठ कांकरोली के श्री द्वारकाधीश मंदिर के नए पीठाधीश का गादी समारोह गोस्वामी परिवार के अंदरूनी विवादों व अदालती पेंच में उलझ गया है। एक पक्ष की ओर से रखी गई संयुक्त पीठाधीश की शर्त मनवाने की कोशिशों के बीच मंदिर ट्रस्ट के नए अध्यक्ष व गादी समारोह पर असमंजस के बादल मण्डरा रहे हैं। वैष्णव सम्प्रदाय और मंदिर सेवादारों में भी इसकी चर्चाएं हैं।
मंदिर सूत्रों के मुताबिक 83 वर्ष की उम्र में गोस्वामी बृजेश कुमार के निधन के तीन माह बाद भी नए पीठाधीश का गादी समारोह इसलिए तय नहीं हो पाया है, चूंकि गोस्वामी परिवार के एक पक्ष के वरिष्ठ सदस्यों ने तीन लोगों को संयुक्त पीठाधीश बनाने की शर्त रख दी है। कानूनी तौर पर ऐसा मुमकिन नहीं है। हालांकि एक पक्ष ने गत 23 अप्रेल को 'आचार्य तिलकोत्सवÓ के नाम से गादी तिलक कार्यक्रम भी तय करते हुए इसका फौरी प्रचार कर दिया था, लेकिन बाद में कदम खींच लिए।
जानकार बताते हैं कि गादी समारोह मंदिर ट्रस्ट को तय करना होता है। चूंकि दूसरा पक्ष संयुक्त पीठाधीश की व्यवस्था चाहता है और ट्रस्ट का मामला हाईकोर्ट में भी है, लिहाजा गोस्वामी परिवार का कोई भी पक्ष अब गादी समारोह को लेकर ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। ट्रस्ट नियमानुसार संयुक्त तिलकायत या पीठाधीश नहीं हो सकता है। जानकारी बताते हैं कि बृजेश कुमार करीब 42 साल पहले तत्कालीन तृतीय गृहस्वामी बृजभूषणलाल का देवलोकगमन होने पर 14वें पीठाधीश बने थे। इधर, इस सम्बंध में पत्रिका ने ट्रस्टी मुकेश भाई मेहता, गोस्वामी परिवार के पराग कुमार सम्पर्क किया तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मंदिर प्रशासन भी चुप्पी साधे हुए है।

यह है गोस्वामी परिवार
स्वर्गीय बृजेश कुमार सबसे बड़े, पराग कुमार और शिशिर कुमार छोटे भाई हैं। पूर्व पीठाधीश बृजेश कुमार के बड़े पुत्र वागीश बावा हैं, जो गादी परम्परा के उत्तराधिकारी समझे जाते हैं। परिवार में और भी कई सदस्य हैं। वर्ष 1980 में बनी ट्रस्ट डीड के अनुसार कि पीठाधीश के ज्येष्ठ पुत्र ही ट्रस्ट अध्यक्ष हो सकते हैं।

ये हैं ट्रस्ट सदस्य
अध्यक्ष : बृजेश कुमार (निधन होने से पद खाली)
सदस्य : ज्येष्ठ पुत्र वागीश कुमार, मुकेश भाई मेहता (बड़ौदा), कमल सिंह वर्मा (कांकरोली), नगीनदास पारीख (उदयपुर) व शरतचन्द्र शाह (बड़ौदा)। कुल सदस्य : 7 होते हैं, जिनमें से दो पद खाली हैं। एक पीठाधीश के निधन से और दूसरा वागीश कुमार के पुत्र वेदंात कुमार के सदस्य प्रस्ताव पर हाईकोर्ट का स्टे होने से। नियमानुसार ट्रस्ट में गोस्वामी परिवार के अधिकतम तीन ही सदस्य हो सकते हैं।

कानूनी पचड़ों में उलझा ट्रस्ट विवाद
- वर्ष 1980 में बना ट्रस्ट उस वक्त विवादों में आया, जब वर्ष 2018 में गोस्वामी परिवार के दूसरे पक्ष ने ओसरा पद्धति (गोस्वामी परिवार के सभी सदस्यों को बारी-बारी से पूजा का अवसर) के लिए अदालत में वाद लगाया। ट्रस्ट डीड के आधार पर यह खारिज हुआ।
- वर्ष 2021 में देवस्थान सहायक आयुक्त ने एक वाद में सुनवाई करते हुए दूसरे पक्ष के पराग कुमार व शिशिर कुमार के बनाए ट्रस्ट को मान्यता देते हुए बृजेश कुमार के ट्रस्ट को अवैध घोषित कर दिया।
- इस फैसले के विरुद्ध देवस्थान आयुक्त के समक्ष की गई अपील पर 21 जून, 2022 को आए फैसले में ट्रस्ट डीड की नियमावली को परिभाषित करते हुए बृजेश कुमार को ही अध्यक्ष व पीठाधीश माना।
- गत वर्ष 21 जून के देवस्थान आयुक्त के फैसले के खिलाफ दूसरा पक्ष जोधपुर हाईकोर्ट चला गया था। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका 25 अगस्त, 2022 को स्वीकारते हुए सम्बंधित पक्षों को नोटिस जारी किए तथा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। मंदिर व्यवस्थाओं का संचालन वर्तमान में वागीश कुमार की सदस्यता वाला ट्रस्ट ही देख रहा है।
- ट्रस्ट अध्यक्ष गोस्वामी बृजेश कुमार ने गत 27 फरवरी को निधन से पहले 14 नवम्बर, 2022 को राजसमंद उप पंजीयक कार्यालय में प्रन्यास का 15वां तिलकायत ज्येष्ठ पुत्र वागीश बावा को घोषित करते हुए इसका नोटिस 16 फरवरी को सार्वजनिक किया।

तृतीय पीठ क्यों है खास?
पुष्टिमार्गीय पराम्परा की तीसरी पीठ कांकरोली में है। इसके अधीन राजस्थान, गुजरात व अन्य राज्यों में करीब डेढ़ सौ से अधिक मंदिर संचालित हैं। हालांकि सभी मंदिरों के ट्रस्ट अलग-अलग हैं, लेकिन ठाकुरजी की सेवा परम्पराएं उसी अनुरूप संचालित होती हैं। तृतीय गृह से जुड़े वैष्णव देश व दुनियाभर में फैले हुए हैं। श्रीनाथजी मंदिर के बाद वैष्णव सम्प्रदाय का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है।