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श्रीनाथजी मंदिर में सम्मुख दर्शन का 350 रुपए शुल्क, बाहर 50-50 रुपए में ये ले रहे दर्शन की गारंटी

श्रीनाथजी मंदिर : नवम्बर 2020 में सोशल डिस्टेंसिंग के लिए लागू की थी शुल्क व्यवस्था, टेम्पल बोर्ड का खजाना छलक रहा, वैष्णवों के साथ धोखा नहीं रोक पा रहा

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राजसमंद. जगतप्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर में 350 रुपए में 'सम्मुख दर्शनÓ व्यवस्था लागू होने से टेम्पल बोर्ड का खजाना तो छलका, मगर दर्शनार्थियों के साथ मंदिर में ही वीआईपी दर्शन के नाम पर हो रहे छलावे को नहीं रोक पाया है। बाजार में 50-50 रुपए में 'दर्शन कराने वालोंÓ की मौजूदगी और अन्दर तक उनका दखल इसे साबित करता है।
शिवमूर्ति स्थित पार्किंग से लेकर मंदिर के बाहर तक करीब दो किलोमीटर के मार्ग में जगह-जगह मंदिर में 'भीड़ से अलगÓ दर्शन के नाम पर प्रत्येक दर्शनार्थी 50-50 रुपए शुल्क अवैध रूप से लिया जा रहा है। दर्शनार्थी परिवारों के समूह में होने पर पूरा मंदिर भ्रमण कराने के लिए अलग से इच्छानुसार 'सेवाशुल्कÓ भी लिया जाता है। पांच दर्शनार्थियों के एक हजार रुपए तक भी वसूल लिए जाते हैं।

बोर्ड का ऐसी व्यवस्था से इनकार, मगर रोकने में भी नाकाम
श्रीनाथजी मंदिर मण्डल के अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मंदिर के बाहर बनी हुई किसी भी व्यवस्था से मंदिर प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इसे रोकन में नाकामी के सवाल पर वे सिर्फ इतना कहते हैं कि 350 रुपए शुल्क देकर सम्मुख दर्शन करने वाले श्रद्धालु खुश हैं।

श्रद्धालु उन्हें समझते हैं मंदिर के सेवाकर्मी
बाहर सशुल्क दर्शन के लिए मान-मनौव्वल करने वालों को बाहरी श्रद्धालु मंदिर से जुड़े सेवाकर्मी मानते हैं। अच्छे दर्शनों की आस में वह पैसा दे देते हैं, लेकिन उन्हें सम्मुख दर्शन के पीछे वाली कतार में ले जाया जाता है। पहली पंक्ति में दर्शन कराने की मांग पर 350 रुपए की रसीद प्रत्येक दर्शनार्थी की कटा दी जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह कि बाहर अवैध रूप से पैसा लेकर कथित सेवाकर्मी अन्दर दर्शन कराने कैसे पहुंच जाते हैं? इधर, इस सम्बंध में मंदिर मण्डल सीईओ जितेन्द्र ओझा से सम्पर्क करने पर उनका फोन नो रिप्लाई आया।

कोरोनाकाल में इसलिए शुरू की थी सशुल्क व्यवस्था
- केन्द्र व राज्य सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक भीड़ कम करने व सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने के लिए
- पहले खैवा पद्धति से दर्शन होते थे, जिनमें रेलिंग नहीं लगी थी। बाद में रेलिंग लगाकर दर्शन कराने पर ही मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने की अनुमति मिली।
- मंदिर प्रशासन का दावा है कि इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं को आराम से दर्शन का लाभ मिलता है।

फैक्ट फाइल...
350 रुपए प्रत्येक दर्शनार्थी एक झांकी के दर्शन का
2000 दर्शनार्थी प्रतिदिन सभी झांकियों में करते हैं सम्मुख दर्शन
2.10 करोड़ रुपए प्रतिमाह केवल दर्शनों से होती है आय
20-25 करोड़ रुपए औसतन आय सशुल्क दर्शन व्यवस्था से

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