
Terracotta art खमनोर. मोलेला की मृण शिल्पकला को विश्वभर में ख्याति दिलाने वाले कलाकारों में सबसे अग्रणी भूमिका अदा करने वाले वयोवृद्ध कलाकार मोहनलाल कुम्हार का शुक्रवार देर शाम निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे।
मोहनलाल ने अपने पिता चतुर्भुज से ये कला सीखी थी। मोलेला की पारंपरिक मृणशिल्प कला को और समृद्ध बनाने, मॉडर्न आर्ट से युवा कलाकारों को नई दिशा देने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कला से जुड़ी उपलब्धियों के लिए मोहनलाल को वर्ष 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। उन्हें 1988 में राष्ट्रीय पुरस्कार, 2003 व 2005 में शिल्पगुरु अवार्ड, 1984 में राज्य पुरस्कार, 2019 में राजस्थान शिल्प रत्न पुरस्कार सहित दर्जनों राज्य, राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय सम्मान मिले। मोहनलाल ने ऑस्ट्रेलिया, अमरीका, फ्रांस, स्पेन, ग्रीस, अर्जेंटीना सहित 11 देशों के विश्वविद्यालयों, कला उत्सवों, कला मेलों और प्रदर्शनियों में मोलेला की कला को उम्दा तरीके से प्रदर्शित किया। धोती, कुर्ता, चूंदड़ी पगड़ी और चमड़े की देसी मोजडिय़ां उनका पसंदीदा पहनावा था। वह अपनी कला और पहनावे के कारण विदेशी मंचों पर भी ध्यान खींचते थे। मोहनलाल ने अपने दो बेटों दिनेश और राजेंद्र को भी मृणकला में महारत दी। उनका शनिवार को मोलेला-खमनोर के बीच बनास नदी के घाट पर राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार हुआ, जिसमें सैंकड़ों लोग शामिल हुए। परिजनों, कलाकारों और कलाप्रेमियों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इस मौके पर पद्मश्री श्यामसुन्दर पालीवाल भी मौजूद थे।
Published on:
08 Jul 2023 10:55 pm

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