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सीनियर्स के बर्ताव से परेशान दिव्यांग चिकित्सक ने खाई नींद की गोलियां, जिला अस्पताल में भर्ती

पिछले दिनों हुई घटनाओं को लेकर सुरक्षा की मांग पर पति ने एसपी को सौंपा ज्ञापन, 20 घंटे बाद हालत में सुधार, मानसिक रोग विभाग में उपचार की सलाह

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राजसमंद. आमेट के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कार्यरत महिला रोग विशेषज्ञ दिव्यांग डॉ. ममता प्रजापत निवासी भीलवाड़ा ने कथित तौर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के बर्ताव और दबाव से परेशान होकर मंगलवार देर रात नींद की गोलियां खा लीं, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। आरके जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनकी हालत में 20 घंटे बाद सुधार है और स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।
सूत्रों के अनुसार डॉ. प्रजापत ने बीती रात घर पर ही नींद की करीब 10 गोलियां खा ली थीं। तबीयत खराब होने पर उनके पति सुबह 6 अस्पताल ले गए, जहां से आरके जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया गया। बुधवार सुबह 8 बजे यहां आईसीयू में भर्ती कर उनका इलाज शुरू किया गया। आईसीयू प्रभारी डॉ. कृपाशंकर झीरवाल ने बताया कि लाने के दौरान उनका ब्लड प्रेशर काफी कम हो चुका था। उपचार के बाद दोपहर तक उनकी हालत में सुधार हुआ। ऐहतियात के तौर पर उन्हें आईसीयू में ही भर्ती रखकर उपचार किया जा रहा है, लेकिन हालत खतरे से बाहर है। महिला चिकित्सक के पति ने बताया कि मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्हें मानसिक रोग विभाग को रैफर किया जा रहा है।

सीनियर्स पर आरोप, तीमारदारों से भी सुरक्षा का बताया खतरा

आरके जिला चिकित्सालय की ओर से पुलिस को इस घटना के बारे में सूचित किया गया। इधर, डॉक्टर के पति अक्षत राजावत ने घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। इसमें आमेट अस्पताल के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों पर कामकाज को लेकर मानसिक रूप से परेशान करने व रोगियों के तीमारदारों द्वारा भी लगातार धमकियां देने का जिक्र किया है। पत्रिका से बातचीत में महिला चिकित्सक के पति राजावत ने आरोप लगाया कि दिव्यांग महिला चिकित्सक को कार पार्किंग भी नहीं करने दी जाती। अस्पताल घर से करीब 300 मीटर दूर है। रात में कोई केस आने पर दिव्यांग होने की वजह से सुरक्षा गार्ड की मांग भी अनसुनी की गई। कुछ लोग आए दिन धमकाते हैं। 20 दिन पूर्व भी रात में कुछ लोगों ने धमकी दी, घर का गेट तोड़ दिया। एक घटना के दौरान कोई व्यक्ति ओपीडी में चाकू दिखाकर गया था। पुलिस में रिपोर्ट देने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इधर, अस्पताल प्रशासन पर भी मानसिक तौर पर परेशान करने का आरोप जड़ा। पति अक्षत ने बताया कि सीएमएचओ को शिकायत करने पर भी वरिष्ठ चिकित्सकों का पक्ष लिया जाता है।

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कोई ड्यूटी नहीं करेगा और मुझे केवल शिकायत लिखकर देगा तो मैं क्या करूंगा। कोई 8 बजे पहले कोई साइन करके घर चला जाए, उसमें मैं क्या करूं।
-डॉ. प्रकाशचन्द्र शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

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