
गिरीश पालीवाल@खमनोर. मचींद के वांकेराव बावजी मंदिर परिसर में 21वीं सदी में बना ये गगनचुंबी स्तम्भ चित्तौड़ के किले में 15वीं शताब्दी में बने ऐतिहासिक विजय स्तंभ की बड़ी ही जबरदस्त प्रतिकृति है। मंदिर के इस वैभवशाली स्तंभ की बनावट में विजय स्तंभ से काफी समानताएं हैं। विजय स्तंभ की ही तरह ये नौ खंडों में बना है। ऊंचाई भी करीब उतनी ही है। जमीन से देखें तो स्तंभ का शिखर आसमान छूता नजर आता है और शीर्ष पर जाकर नीचे देखें तो धडक़नें बढ़ जाती है। मंदिर के पुजारियों और प्रबंधकों ने पिछले दशकों में इस स्तंभ का निर्माण करवाया था। बताते हैं कि प्रेरणा चित्तौडग़ढ़ के गौरव विजय स्तंभ से ही ली गई। मंदिर का ये स्तंभ मौजूदा दौर में वास्तु और स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है। इस अद्भुत स्तंभ को बनाने में हजारों टन सफेद मार्बल पत्थर, लोहा व अन्य निर्माण सामग्री ही नहीं, सैकड़ों कारीगर-मजदूरों को कई वर्ष लगे। दूर-दूर से वांकेराव मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं, दीन-दुखियों के लिए ये स्तम्भ आकर्षण का केंद्र रहता है। स्तंभ में प्रवेश कर गर्भ भाग में बने सोपान (सीढिय़ों) से ऊपर तक पहुंचा जा सकता है। 135 से ज्यादा सीढिय़ों का सफर दम फुलाने लगता है तो बीच-बीच में गोखड़े और झरोखे बैठ जाने पर आराम, ठंडी हवा और सुकून देते हैं।
Updated on:
04 Aug 2023 09:43 am
Published on:
04 Aug 2023 09:42 am

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