
खमनोर. देलवाड़ा ब्लॉक के सेमल गांव में संचालित एक गोशाला में शनिवार को बाहर से ताला जड़ा था और अंदर गायें और बछड़े भूख-प्यास से तड़प रहे थे। ग्रामीणों ने ये आरोप गोशाला संचालकों पर लगाया है। वहीं संचालक का आरोप है कि गोशाला चलाने में लोगों का सहयोग नहीं मिल रहा है, इसलिए बहुत कठिनाई और विपरीत परिस्थितियों में जैसे-तैसे गोपालन किया जा रहा है।
सेमल गांव में माताजी के मंदिर के पास संचालित गोशाला में गोवंश के भूख-प्यास से कमजोर और बीमार होने का ये मामला सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि शनिवार रात करीब 8 बजे गोशाला से गायों के रम्भाने की आवाजें आईं तो वे दौड़कर पहुंचे। ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और देखा तो हालात चौंकाने वाले नजर आए। गायों-बछड़ों काे एक जगह बंद कर ताला लगा रखा था। गायें और बछड़े भूख-प्यास से व्याकुल हो रहे थे। उन्होंने गोवंश को पानी पिलाया और गोशाला में ही एक जगह पड़ा खुखला लाकर डाला। एक गाय की मौत हो चुकी थी। दूसरी जमीन पर बेसुध हालत में पड़ी तड़प रही थी। ग्रामीणों के बुलावे पर सुबह देलवाड़ा से कम्पाउंडर जगदीश गुर्जर व विजयसिंह पहुंचे। उन्होंने बीमार व कमजोर गाय-बछड़ों का प्राथमिक उपचार किया। लोगों का आरोप है कि गोशाला में गायों को पर्याप्त चारा-पानी नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने गोशाला की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए आक्रोश जताया। इधर, गोशाला का कार्मिक रविवार सुबह पहुंचा। उसका कहना है कि वह एक दिन पहले ही घर गया था। कार्मिक ने भी बताया कि बड़ी मुश्किल से गायों को सिर्फ खुखला मिल पा रहा है। गायों की देखभाल में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
Published on:
27 Aug 2023 10:26 pm

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