1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेवाड़ की तरह असम ने भी कभी गुलामी नहीं स्वीकारी- कटारिया

नागरिक अभिनंदन समारोह में असम के राज्यपाल ने दी मेवाड़ राजवंश की मिसाल  

2 min read
Google source verification
photo_2023-08-29_18-06-06.jpg

राजसमंद. असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि प्रताप से पहले भी मेवाड़ राजवंश ने धर्म और संस्कृति के लिए अतुलनीय बलिदान दिया, लेकिन प्रताप ऐसे शासक हुए, जिन्होंने सारे कष्टों को स्वीकारते हुए मेवाड़ का सिर नहीं झुकने दिया। मैं जिस जगह गया हूं, मेवाड़ की तरह उस असम ने भी कभी गुलामी स्वीकार नहीं की।

कांकरोली के बालकृष्ण विद्याभवन परिसर में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में कटारिया ने कहा कि मेवाड़ के शासकों ने दुश्मनों को ललकारा कि जब तक मेवाड़ राज परिवार की तलवार खड़ी है, तब तक भगवान एकलिंगनाथजी को कोई छू नहीं सकता। मेवाड़ ने आग में कूदने का काम किया।

- ‘मेरे साथी समर्पण में मुझसे कम नहीं थे, पद मेरे भाग्य में था’

कटारिया ने कहा, कोई मुझसे कम नहीं है। उन्होंने पूर्व सांसद स्व. हरिओम सिंह राठौड़ का जिक्र किया और कहा, वह मुझसे चार कदम आगे थे। भानू पालीवाल, जगदीश और अन्य लोगों का नाम लिया और कहा कि मेरा भाग्य तगड़ा था, जो मुझे यह पद मिला। कई साथी मुझसे भी ज्यादा योग्य थे। समर्पण में मुझसे भी ज्यादा थे। मेरा यह अभिनंदन आपका प्यार और आशीर्वाद है।

- भगवान की कृपा से मिला लोकतंत्र
कटारिया बोले कि भगवान की कृपा से देश को लोकतंत्र मिला। इससे बढिय़ा और क्या हो सकता है कि आप चाहे जिसे चुनो और वोट की पेटी में बंद कर दो। यह जनता के हाथ में है। कटारिया ने कहा कि दुनिया को भारत को तलवार के दम पर नहीं, अपने ज्ञान और विज्ञान के आधार पर मानवता का संदेश दिया। यही एक संस्कृति है, जो जिओ और जीने की बात कहती है। दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं कहता है।

- चन्द्रयान और मोदी की तारीफ
समारोह में कटारिया ने कहा कि हमारा तीसरा चन्द्रयान सफलतापूर्वक पहुंच गया। देश के प्रधानमंत्री कहते हैं, यह मानवता के लिए देश की सफलता का चांद पर कदम है। उन्होंने उस स्थान का नाम दिया शिव शक्ति। शिव शक्ति एक ऐसी अदृश्य शक्ति है कि राम को भी लंका विजय के लिए जाते समय भगवान रामेश्वर के चरण छूकर आशीर्वाद लेकर जाना पड़ा, तब सफलता मिलती है।

- महादेव से जीवन के संघर्ष की व्याख्या
कटारिया बोले, महादेव है क्या। हैं तो पत्थर के ही। इसे इसलिए पूजते हैं कि वह पत्थर नदी में इतने चपेटे खाता है कि रगड़ाकर महादेव की आकृति ले लेता है, उसी को पूजा जाता है। किनारे लग जाने वाले पत्थर दीवारों में चुन दिए जाते हैं। जिन्दगी में कठिनाइयों से भागने पर दीवारों में चुने जाओगे। कठिनाइयों का मुकाबला करते हुए सफलता हासिल करने वाले पूजे जाते हैं। उन्होंने देश में धार्मिक मान्यताओं की स्वतंत्रता बरकरार रखने और देशभक्ति के महत्व पर भी जोर दिया।

- भावुक हुए कटारिया
राज्यपाल ने कहा कि दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं, जहां मां की कोख से भगवान पैदा होते है। सिर्फ भारत में ऐसा होता है। किसने सोचा था कि कौशल्या के पेट से पैदा हुआ बच्चा भगवान राम बनेगा, लेकिन उन्हें भी संघर्ष करने पड़े। भगवान श्रीराम के वनवास प्रस्थान का प्रसंग सुनाते हुए कटारिया भावुक हो गए और मां सीता के समर्पण को अद्भुत बताया। कार्यक्रम के आखिर में राज्यपाल कटारिया को लोगों ने फूल-मालाओं से लाद दिया।

ये भी थे मौजूद
सांसद दीया कुमारी, विधायक दीप्ति माहेश्वरी व सुरेन्द्र सिंह राठौड़, भाजपा जिलाध्यक्ष मान सिंह बारहठ, पूर्व पालिकाध्यक्ष महेश पालीवाल, अशोक रांका सहित कई प्रबुद्धजन व शहरवासी मौजूद थे।

Story Loader