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जंगल-पहाड़ों और मंदिर तो कोई विरासतों में पर्यटन को ढूंढता हुआ पहुंचता है यहां

World Tourism Day लेकसिटी के बाद सैलानियों का अगला पड़ाव राजसमंद, कुम्भलगढ़, नाथद्वारा, हल्दीघाटी और कांकरोली में भी सालभर होती है खूब आमद

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World Tourism Day राजसमंद. प्रतिवर्ष लेकसिटी भ्रमण के बाद हजारों घरेलू और विदेशी सैलानी राजसमंद जिले के पर्यटनस्थलों का रुख करते हैं। सर्दी-गर्मियों में सीजन के वक्त तमाम होटल, धर्मशालाओं में ठहरने के लिए कमरे तक नहीं मिलते। श्रीनाथजी, द्वारकाधीशजी और चारभुजा गढ़बोर धार्मिक पर्यटन के खास-लोकप्रिय केन्द्र हैं, तो हल्दीघाटी और कुम्भलगढ़ में सैलानी ऐतिहासिक विरासतों के दीदार करने पहुंचते हैं। जंगल सफारी के अलावा जिले में स्थित तीन पैनोरमा पर भी धीरे-धीरे पर्यटक बढऩे लगे हैं।

- कुम्भलगढ़ : ढाई लाख पर्यटक हर साल आते हैं
विश्व विरासत कुम्भलगढ़ देखने और जंगल सफारी के लिए यहां हर साल औसतन ढाई लाख देशी-विदेशी सैलानी आते हैं। मौजूदा वर्ष में अब तक 2 लाख 78 हजार 290 पर्यटक आ चुके हैं, जिनमें 4039 विदेशी शामिल हैं। पिछले वर्ष 7 नवम्बर को जी-20 समिट में शामिल शेरपाओं का दल भी कुम्भलगढ़ देखने पहुंचा था।

- हल्दीघाटी : शौर्यधरा को करते हैं नमन
मेवाड़ के स्वाभिमान की लड़ाई महाराणा प्रताप के नेतृत्व में हल्दीघाटी में लड़ी गई, जहां की मिट्टी को नमन करने हर साल लाखों लोग आते हैं। ज्यादातर घरेलू पर्यटक होते हैं, जो चेतक समाधि, रक्ततलाई, शाहीबाग व म्यूजियम देखने परिवार सहित पहुंचते हैं। यहां से पांच किमी दूर ही मृणशिल्प कला के लिए प्रसिद्ध मोलेला गांव भी है।

नाथद्वारा : श्रीनाथजी में सर्वाधिक भीड़
जिले के धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केन्द्र नाथद्वारा है, जहां हर वर्ष करीब 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालु श्रीनाथजी, विट्ठलनाथजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां स्थित विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा से भी पर्यटन को पंख लगे हैं। नाथद्वारा की पिछवाई कला, हवेली संगीत और परम्परा-संस्कृतिक को जानने-समझने भी लोग आते हैं।

द्वारकाधीशजी : झील किनारे ठाकुरजी की हवेली
राणा राज सिंह द्वारा साढ़े तीन सदी पूर्व बनवाई गई राजसमंद झील के किनारे प्रभु द्वारकाधीशजी का मंदिर स्थित है, जहां प्रभु दर्शन के लिए प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। दर्शन के बाद झील स्नान कर भक्त स्वयं को धन्य महसूस करते हैं। वैष्णव सम्प्रदाय का जिले में यह तीसरा सबसे बड़ा मंदिर है।

पैनोरमा : पन्नाधाय, राज सिंह और कुम्भा को जानने आते हैं पर्यटक
आमेट के कमेरी में मां पन्नाधाय, राजसमंद झील किनारे नौचोकी पर राणा राज सिंह और देवगढ़-मदारिया में महाराणा कुम्भा पैनोरमा स्थित है। कुछ ही वर्षों में बने इन तीनों पैनोरमा पर भी धीरे-धीरे पर्यटकों की संख्या बढऩे लगी है। मेवाड़ के ऐतिहासिक तथ्यों से पर्यटक रू-ब-रू होते हैं।

गोरमघाट : पहाड़ों में फलता है बेहिसाब पर्यटन
देवगढ़ के पास स्थित गोरमघाट एक पहाड़ी पर्यटनस्थल है, जहां केवल मीटरगेज ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। हर साल, खासकर वर्षाकाल में लाखों पर्यटक प्राकृतिक झरने, हरियाली और सुरम्य नजारों का दीदार करने मावली-मारवाड़ ट्रेन से यहां पहुंचते हैं। राजस्थान में ऐसा प्राकृतिक पर्यटनस्थल दुर्लभ है।

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