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जब राजस्थान कांग्रेस के इस दिग्गज नेता को उनके ही सिपहसालार ने दे दी थी एक वोट से मात

Rajasthan election 2023 : वर्ष 2018 में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पार्टी को सत्ता में लाकर खुद हो गए थे दौड़ से बाहर

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Rajasthan election 2023 : जितेन्द्र पालीवाल@राजसमंद. बात दिसम्बर, 2008 की है। 4 तारीख को ईवीएम में बंद मतों की चार दिन बाद हुई गणना में नाथद्वारा विधानसभा सीट पर ऐसा नतीजा सामने आया कि उसने राजस्थान और देशभर के लोगों को चौंका दिया था। तब 59 साल के दिग्गज कांग्रेसी नेता सीपी जोशी को उनके ही सिपहसालार रहे कल्याण सिंह चौहान (48) ने भाजपा से टिकट हासिल कर सिर्फ एक मत के अंतर से मात दे दी।
सीपी कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी थे, जिन्हें मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था, लेकिन उनकी रेस हार के साथ ही खत्म हो गई। कल्याण सिंह को 62216 वोट और सीपी को 62215 वोट मिले। जोशी की पत्नी ने उस चुनाव में मतदान नहीं किया था। अगर ऐसा होता तो शायद चुनावी नतीजों की तस्वीर कुछ और होती। 2008 के उस चुनाव परिणाम की देशभर में मतदान जागरूकता अभियानों में मिसाल भी देकर लोकतंत्र में एक-एक मत की कीमत समझाई जाती है।

- कांग्रेस की आपत्ति पर दोबारा हुई मतगणना
कांकरोली के बालकृष्ण स्कूल में हो रही मतगणना के दौरान जोशी जयपुर कांग्रेस मुख्यालय में थे, जहां पार्टी के सत्ता में आने के रुझानों का जश्न शुरू हो गया था। नतीजे पर कांग्रेस के लोगों ने आपत्ति जताते हुए दोबारा मतगणना करने का प्रार्थना-पत्र निर्वाचन अधिकारी को दिया। करीब डेढ़ घंटे में ईवीएम से दोबारा गुणना हुई तो कल्याण सिंह के पक्ष में ही परिणाम आया, लेकिन नतीजों की घोषण रोके रखी गई। मौके पर मौजूद पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी के दखल और विरोध दर्ज कराने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने एक मत से कल्याण सिंह को विजेता घोषित कर दिया।

- हाईकोर्ट से प्रत्याशी, पत्नी और दो एजेंटों को सजा, नतीजा निरस्त
एक वोट से हार-जीत की लड़ाई में कई रोचक मोड़ आए। कल्याण सिंह के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट तक चली कानूनी लड़ाई में मौजूद रहे अधिवक्ता नीरज शर्मा बताते हैं कि बहुत कम लोगों को पता है कि जोशी खेमे ने हाईकोर्ट में नतीजे को चुनौती दी, जिसमें कल्याण सिंह की पत्नी के नाम से दो बूथों पर अलग-अलग फर्जी मतदान होने का दावा किया। अदालत में पेश सबूतों के आधार पर हाईकोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी कल्याण सिंह, उनकी पत्नी और दोनों बूथों के एजेंट को सजा सुना दी और चुनाव निरस्त कर दिया। फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। तीन जजों की बैंच ने तीन साल से ज्यादा समय तक सुनवाई की। इस बीच सीपी जोशी भीलवाड़ा से सांसद का चुनाव जीतकर केन्द्र सरकार में मंत्री बन गए। सर्वोच्च अदालत में खुले छह टेण्डर मतों में दोनों के तीन-तीन वोट आए। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को पूछा कि क्या आप विधायक बनना चाहोगे? नीरज बताते हैं कि अभियोजन के जवाब के आधार पर 1 अप्रेल, 2013 को चौहान की विधायिकी बरकरार रखी व सजामुक्त किया। वर्ष 2013 के चुनाव में चौहान सीपी के करीबी देवकीनंदन गुर्जर को 12472 मतों से हराकर दोबारा विधायक बने थे।

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