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डेढ़ महीने से खुद के जिन्दा होने की सफाई दे रहा रतनलाल

कोरोना को दे दी मात, जिला अस्पताल की गलती के आगे हारा रतनलाल, चिकित्सा विभाग ने शामिल कर लिया कोरोना मृतकों की सूची में, विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों के बार-बार फोन आने से है परेशान  

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डेढ़ महीने से खुद के जिन्दा होने की सफाई दे रहा रतनलाल

डेढ़ महीने से खुद के जिन्दा होने की सफाई दे रहा रतनलाल

राजसमंद/कुंवारिया. फरारा गांव का एक 40 वर्षीय व्यक्ति चिकित्सा विभाग की एक छोटी सी गलती की सजा भुगत रहा है। चिकित्सा विभाग ने अपने रिकॉर्ड में उसकी कोरोना से मौत होना मान लिया। डेढ़ महीने से उसके पास कई विभागों से बार-बार फोन आ रहे हैं, जिनके जवाब में अपनी मौत नहीं होने की सफाई देते-देते वह परेशान हो चुका है। वह अब गुस्से में भी है, लेकिन करे तो क्या करे।
हुआ यूं कि रतनलाल लोहार पुत्र मांगीलाल ने कोरोना होने की आशंका पर गत 15 अप्रेल को आरके जिला चिकित्सालय में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया। उसकी रिपोर्ट 16 अप्रेल को पॉजिटिव आई। फिर रतनलाल ने फरारा स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र से कोरोना दवा का किट लिया और होम आइसोलशन हो गए। 27 अप्रेल को फिर कोरोना जांच का सैंपल दिया, जिसकी 29 अप्रेल को नेगेटिव रिपोर्ट मिल गई। रतनलाल लौहार खुश था कि उसने कोरोना को मात दे दी। उसने अपना प्लम्बर का काम फिर से शुरू कर दिया।

मई के तीसरे सप्ताह से आने लगे फोन
रतनलाल को मई में जिला चिकित्सालय व कई सरकारी दफ्तरों से लगातार फोन आना शुरू हो गए। रतनलाल के फोन नम्बर पर बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है। रतनलाल ने हर कॉल पर सफाई देते हुए कहा कि साहब! मैं जिंदा हूं एवं स्वस्थ हूं। चिकित्सा विभाग ने कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु को लेकर जारी 62 लोगों की सूची में 29वां नाम रतनलाल लोहार निवासी फरारा लिख दिया। उसके कॉलम में मोबाइल नम्बर अंकित है तथा उम्र 35 वर्ष लिखी है। रतनलाल को 22 अपे्रल को आरके जिला चिकित्सालय में भर्ती होने, 27 को रिपोर्ट पॉजिटिव आने तथा 28 अप्रेल को मृत्यु होने का उल्लेख किया।

मैं परेशान, फोन भी साथ रखना पड़ता है
डेढ़ माह में चिकित्सालय, सरकारी विभागों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अनगिनत फोन आ गए हैं। उसके परिवार में मां, पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं, जो साथ रहते हैं। रतनलाल लगातार फोन आने से काफी परेशान है। परिवार के सदस्यों को इस बारे में अब तक इसलिए नहीं बताया है, क्योंकि वे भी परेशान होने लगेंगे। घर-परिवार के लोगों को इस परेशानी का पता नहीं चल जाए, इसलिए रतनलाल हमेशा फोन अपने साथ ही रखते हैं। जब भी फोन आता है, वह खुद ही इसकी सफाई देते हैं। फरारा के उप स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्साकर्मी, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों को भी खुद के जिन्दा होने की बात कई बार बता चुके हैं।

मुझे गत डेढ़ माह में अनेकों बार फोन आ चुके हैं। सभी को मैंने यही कहा कि मैं अभी जिंदा हूं। चिकित्सा विभाग को अपनी रिपोर्ट में सुधार कर लेना चाहिए। मैं परेशान हो चुका हूं।
रतनलाल लोहार, निवासी फरारा

कोरोना संक्रमण से मरे लोगों की सूची मोबाइल पर आई। उसमें एक स्थानीय युवक का नाम भी था, जिस पर पंचायत क्षेत्र के कार्मिकों के माध्यम से पुष्टि कराई गई। हमने पंचायत समिति, राजसमंद के अधिकारियों को भी अवगत कराया है।
लाल सिंह झाला, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत, फरारा

जिस चिकित्सालय में मृत्यु हुई है, वहां से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही सूची में नाम शामिल किए जाते हैं। संबंधित चिकित्सालय प्रबंधन ही कुछ बता सकता है।
डॉ. प्रकाशचन्द्र शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, राजसमंद