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एक स्कूल ऐसा भी जहां गुरुकुल की तर्ज पर शिक्षा पा रहे नौनिहाल

प्राथमिक स्कूल भोपा की भागल में प्राकृतिक वातावरण में पढ़ रहे बच्चे

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Madhulika Singh

Sep 18, 2016

school education news in rajsamand

school education news in rajsamand

मोलेला ग्राम पंचायत क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भोपा की भागल अन्य स्कूलों से कुछ हटकर है। गुरुकुल जैसे वातावरण वाले इस विद्यालय में बच्चे न केवल चार किलोमीटर तक दूर से खींचे चले आते हैं, बल्कि यह उन्हें घर लौटने से भी रोकता है। विद्यालय परिसर में पेड़-पौधों के साथ ही पक्षियों के लिए कृत्रिम घोंसले हैं, जो पक्षियों को भी रहने, खाने का सलीका सिखाते हैं।

नाथद्वारा से करीब 9 किमी दूर भोपा की भागल में 25 घरों की बस्ती के बाहर राजकीय प्राथमिक विद्यालय है। गांव में बच्चों की संख्या कम होते हुए भी स्कूल में 1 से 5 तक 65 बच्चों का नामांकन है। इसमें चार किलोमीटर दूर संकारा, कालबेलिया बस्ती, मुंडवाला, वालेट की भागल, गायरियों की भागल से बच्चे पढऩे आते हैं। बच्चों के खेलने के लिए इसमें चार तरह के झूले, फिसलपट्टी सहित कई खिलौने हैं। कक्षा-कक्षों सहित पूरे स्कूल परिसर में ज्ञानवर्धक आलेख लिखे हैं, हर कमरे में टीवी है।

शिक्षा का स्तर भी बेहतर

सामान्य तौर पर जहां 5वीं तक के बच्चों को अपना पूरा पाठ्यक्रम ज्ञात नहीं होता, वहीं इस स्कूल के बच्चों को राजस्थान सहित पूरे देश का सामान्य ज्ञान पता है। 30 तक पहाड़ा आता है। अंग्रेजी व हिंदी की पुस्तकों का वाचन, कविता, आर्ट का बेहतर ज्ञान है।

गर्मियों की छुट्टी में भी आते हैं स्कूल

इस स्कूल में पेड़-पौधों के रख-रखाव के लिए अध्यापक कृष्ण गोपाल गुर्जर गर्मियों की छुट्टी में भी आते हैं। उनका कहना है कि जब से स्कूल की स्थापना हुई, तब से मैं पौधों को पाल रहा हूं, अब इनकी देखरेख तो करनी ही पड़ेगी। स्कूल में संस्था प्रधान माधवी जोशी सहित तीन का स्टाफ है, जो बच्चों को पढ़ाने के साथ ही यहां की हरियाली बनाए रखने में भी सहयोग करता है।

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इस स्कूल की ये बातें हैं खास

वर्ष 2001 में बने इस विद्यालय में आज 95 प्रजाति के 1000 से अधिक पेड़-पौधे हैं, जो स्कूल की शोभा में चार चांद लगाते हैं।

सभी पेड़ों पर कृत्रिम घोंसले लगे हुए हैं, जो पक्षियों के आकार के अनुसार हैं ताकि अन्य पक्षी उन घोसलों में नहीं घुसें।

अलग-अलग आकार के पिंजरों में पक्षियों के लिए उनके अनुरूप दाना डाला जाता है।

बोतलों को काटकर पक्षियों के लिए चुग्गा पात्र बनाए गए हैं, जिससे बारिश में दाना नहीं भीगता।

95 से अधिक प्रजाति के औषधीय तथा फल-फूलदार पौधे लगे हैं तथा 25 से अधिक प्रजाति के पक्षी मौसम के अनुसार आते हैं।

1000 से करीब पेड़ -पौधे है स्कूल में

95 प्रजाति के पेड़-पौधे हैं स्कूल परिसर में

25 से अधिक प्रजाति के पक्षी करते हैं कलरव

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