
राजसमंद. शहर में स्वच्छ, प्रेशर युक्त और नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराने के लिए जलदाय विभाग की ओर से अमृत 2.0 के तहत होने वाले 20.83 करोड़ के कार्यो के टेण्डर आमंत्रित किए हैं। ऐसे में फरवरी माह के अंत तक काम शुरू होने की उम्मीद है। इसके तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने सहित कई कार्य करवाए जाएंगे। शहर का विस्तार लगातार हो रहा है। कई जगह नई कॉलोनियां विकसित हो रही है। इसके कारण कई स्थानों पर पाइप लाइन का अभाव है तो कहीं पर पानी का प्रेशर कम आने की शिकायत हैं। ऐसे में जलदाय विभाग की ओर से उक्त समस्या का समाधान करने के लिए अमृत-2 के तहत कराए जाने वाले कार्यो के लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए हैं। इसके तहत कई स्थानों पर उच्च जलाशय, भूतल जलाशय, डब्ल्यूटीपी को अपग्रेड करने और पानी की पाइप लाइन बिछाने सहित कई कार्य करवाए जाएंगे। उक्त टेण्डरों की पूरी प्रक्रिया करने के पश्चात फरवरी माह के अंत तक काम शुरू होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि विभाग की ओर से 22 करोड़ प्रस्ताव बनवाकर भेजे गए थे। लेकिन इसमें कुछ कटौती कर अब 20.83 करोड़ के काम करवाए जाएंगे।
20.83 करोड़ की लागत से होंगे विभिन्न कार्य
104 किमी पानी सप्लाई की लाइन बिछाई जाएगी
016 किमी लोहे की डीआई पाइप लाइन बिछेगी
400 केएल का नई आबादी कोयड़ में एसआर निर्माण
100 केएल का अरिहंत नगर में एसआर निर्माण
100 केएल का सनवाड़ में जीएलआर निर्माण
1500 केएल का साधना शिखर पर जीएलआर निर्माण
285 किलोलीटर प्रति घंटा पानी डब्ल्यूटीपी करेगा साफ
शहरी क्षेत्र में राजसमंद झील से पानी की सप्लाई होती है। वर्तमान में 48 घंटे में पानी की सप्लाई की जा रही है। शहरी क्षेत्र में करीब 17 हजार कनेक्शन है। प्रतिदिन सर्दी में 13 से 14 एमएलडी पानी की सप्लाई की जाती है। सर्दी में पानी की डिमांड कम और गर्मी में यह बढकऱ 16 से 17 एमएलडी हो जाती है। बारिश के पश्चात झील का जलस्तर 28 फीट तक पहुंच गया था। हालांकि वर्तमान में सिंचाई के लिए नहरें खुलने के कारण जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का तुलसी साधना शिखर पर दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बने हुए हैं। इसमें एक एसटीपी का निर्माण 1992 में हुआ था, वह काफी पुराना हो गया है। इसके पास ही नया डब्ल्यूटीपी बना हुआ है। इसकी क्षमता 15 एमएलडी है, जबकि इससे वर्तमान में 16-17 एमएलडी पानी शुद्ध करवाया जा रहा है। ऐसे में इसके पास पुराना एसटीपी बना हुआ है। उसकी जगह 7 एमएलडी का एसटीपी का निर्माण करवाया जाएगा। इससे इसकी क्षमता 22 एमएलडी तक हो जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को 2056 तक साफ और शुद्ध पीने का पानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
शहरी क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अमृत फेज-2 में 20.83 करोड़ की लागत के कई कार्य करवाए जाएंगे। इसमें वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अपग्रेड सहित कई कार्य शामिल है। इसके लिए गत दिनों टेण्डर आमंत्रित किए गए हैं।
लोकेश सैनी, अधिशांषी अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
Updated on:
22 Dec 2024 11:20 am
Published on:
22 Dec 2024 11:19 am

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