
Cyber Fraud
राजसमंद. डिजिटल दुनिया में जहां दोस्ती और कनेक्शन की बातें होती हैं, वहीं अब यह धोखेबाज़ों के लिए एक नया अखाड़ा बन चुकी है। राजसमंद साइबर थाने में दर्ज हुए पांच मामलों ने एक बार फिर सावधान कर दिया है कि इंटरनेट की स्क्रीन के पीछे छुपा इंसान असल में कोई भी हो सकता है। डिजिटल युग हमें करीब लाया, लेकिन इसी तकनीक ने भरोसे को तोड़ने का एक नया रास्ता भी खोल दिया। राजसमंद में हाल ही में सामने आए साइबर क्राइम के मामलों ने न सिर्फ लोगों की भावनाओं से खेला, बल्कि उनकी जेबों को भी खाली करने का काम किया है। लेकिन साइबर पुलिस ने ऐसे अपराधियों पर नकेल कसने में पीछे नहीं रही। एक के बाद एक कार्रवाई कर मामलों का खुलासा किया और आरोपियों को पकड़ा।
राजसमंद में हाल ही में ऐसे पांच मामले सामने आए, जिनमें इंस्टाग्राम पर लड़कियों की फर्जी आईडी बनाकर लोगों को जाल में फंसाया गया। आरोपी इन प्रोफाइल्स का उपयोग कर पहले पीड़ितों से दोस्ती करते, फिर उन्हें निजी बातचीत में उलझाकर शर्मनाक स्क्रीनशॉट्स और रिकॉर्डिंग्स के जरिए ब्लैकमेल करते थे। राहत की बात यह है कि इनमें से चार मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर लिया गया है — साइबर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर ठोस कार्रवाई की। इनमें कुछ मामलों में तो पैसे भी मांगे गए, लेकिन साइबर सैल टीम ने आरोपियों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की।
राजसमंद में सामने आया दूसरा बड़ा मामला था एक बेहद चालाकी से रचा गया निवेश का जाल।लोगों को जल्दी मुनाफे का झांसा देकर इनवेस्टमेंट स्कीम्स में पैसा लगवाया गया, और फिर न कंपनियां रहीं, न कोई लाभ। इस फ्रॉड में एक करोड़ रुपये से भी अधिक की रकम डूबने का मामला दर्ज हुआ। जिसकी जांच की जा रही है। जल्द ही इसका खुलासा होने वाला है।
राजसमंद साइबर थाना, जो कि 2023 में अस्तित्व में आया, ने अपनी कार्यशैली से अब तक कई जटिल केसों का समाधान कर जनता में विश्वास की नींव मजबूत की है। फर्जी आईडी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में तीव्र कार्रवाई कर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अपराध चाहे वर्चुअल हो या वास्तविक, कानून की पकड़ से बचना असंभव है।
Published on:
08 May 2025 01:41 pm
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