
बांग्लादेश से रामपुर-मुरादाबाद आ रही खेप..
Fake Currency Rampur Bangladesh:रामपुर पुलिस की जांच में नकली नोटों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक बांग्लादेश से जाली करेंसी पश्चिम बंगाल के रास्ते उत्तर प्रदेश के रामपुर और मुरादाबाद तक पहुंचाई जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 75 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि पश्चिम बंगाल के मालदा इलाके से यह सप्लाई चेन संचालित हो रही थी और वहां से नोटों को यूपी में खपाया जा रहा था। पुलिस अब पूरे गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।
रामपुर पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 14 मई की रात भगतपुर तिराहे के पास दो आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान टांडा थाना क्षेत्र के शिकारपुर निवासी वाहिद और मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के रानीनागल निवासी मो. हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से 500 रुपये के 150 नकली नोट बरामद किए, जिनकी कुल कीमत 75 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस के अनुसार नोट इतने असली दिखाई दे रहे थे कि पहली नजर में पुलिसकर्मी भी धोखा खा गए।
एसपी सोमेंद्र मीणा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी वाहिद का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा है। उसके खिलाफ अब तक 23 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, नकली नोट तस्करी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। पुलिस ने उसके पास से 41 हजार रुपये के नकली नोट और एक मोबाइल फोन बरामद किया है। जांच एजेंसियां अब उसके पुराने नेटवर्क और संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।
दूसरे आरोपी मो. हुसैन के पास से पुलिस ने 34 हजार रुपये के नकली नोट और एक मोबाइल फोन बरामद किया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें ये नकली नोट रानीनागल निवासी हनीफ उपलब्ध कराता था। आरोपियों के अनुसार हनीफ 40 हजार रुपये लेकर एक लाख रुपये के जाली नोट देता था। पुलिस अब हनीफ की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और माना जा रहा है कि वही बंगाल सप्लायरों से सीधा संपर्क बनाए हुए था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी वाहिद का परिवार लंबे समय से नकली नोटों के कारोबार से जुड़ा रहा है। एसपी ने बताया कि वाहिद की भाभी भी नकली नोटों के मामले में जेल जा चुकी है और हाल ही में रिहा हुई है। वहीं उसका भाई इसी मामले में कोलकाता की जेल में बंद है। पुलिस का मानना है कि परिवार के कई सदस्य इस नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं और इनके जरिए लंबे समय से नकली करेंसी का कारोबार चल रहा था।
जांच एजेंसियों को पता चला है कि नकली नोट सबसे पहले बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के मालदा इलाके में पहुंचाए जाते थे। इसके बाद वहां से यूपी के रामपुर और मुरादाबाद में सप्लाई की जाती थी। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में कई राज्यों के तस्कर शामिल हैं, जो सीमावर्ती इलाकों से नकली नोटों की खेप देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाते हैं। अब पुलिस पश्चिम बंगाल पुलिस और अन्य एजेंसियों से भी संपर्क साध रही है।
एएसपी अनुराग सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर खंगाली जा रही है। इसके जरिए पुलिस बंगाल में बैठे मुख्य सप्लायर और पूरे गैंग तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर टीम मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस अंतरराज्यीय गिरोह के अन्य सदस्य भी गिरफ्त में होंगे।
पूछताछ में यह खुलासा भी हुआ कि आरोपी नकली नोटों को छोटे लेनदेन और भीड़भाड़ वाली जगहों पर आसानी से चला देते थे। पेट्रोल पंप, स्क्रैप कारोबार, किस्त जमा करने और नकदी के लेनदेन में इन नोटों का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपी असली नोटों की गड्डियों के बीच नकली नोट मिलाकर लोगों को चकमा देते थे। पुलिस का कहना है कि नोटों की प्रिंटिंग और क्वालिटी इतनी बेहतर थी कि आम लोग ही नहीं बल्कि कई बार पुलिसकर्मी भी भ्रमित हो जाते थे। हालांकि एक जैसी सीरीज नंबर होने के कारण आखिरकार यह नेटवर्क पुलिस के शिकंजे में आ गया।
Published on:
16 May 2026 07:05 pm
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