
नई दिल्ली। हम अक्सर आपको भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय बताते रहते हैं। इसके साथ ही हम आपको महाभारत से जुड़े पांडवों के बारे में भी विशेष जानकारियां देते रहते हैं। लेकिन आज हम आपके लिए कुछ अलग किस्म की विशेष जानकारी लेकर आए हैं। आपको तो पता ही होगा कि भगवान शिव गुस्से में किसी को नहीं बख्शते हैं। चाहे वो खुद उनके पुत्र श्री गणेश हों या फिर कोई और, इसी सिलसिले में आज हम आपके लिए भगवान शिव के गुस्से की एक कहानी लेकर आए हैं। जिसका अंजाम खुद पांडवों को भुगतना पड़ा। खास बात ये है कि भगवान शिव के गुस्से का शिकार हुए पांडव कलयुग में हिसाब चुकता करने के लिए फिर से जन्म लिए थे।
आप जानते ही होंगे कि महाभारत के बाद पांडवों के पुत्रों का अश्वत्थामा ने वध कर दिया था। लेकिन इसके बाद किसने क्या कदम उठाया, इसके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे। बता दें कि घटना के बाद की पूरी कहानी भविष्यपुराण में लिखी गई है। भविष्यपुराण के मुताबिक पांडवों के वध के लिए अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य रात के समय पांडवों के आवास पर गए थे। तीनों ने मिलकर भगवान शिव की आराधना करके उनसे पांडवों के आवास में प्रवेश पाने की आज्ञा ले ली। आज्ञा मिलने के बाद तीनों ने मिलकर भगवान शिव से प्राप्त अस्त्र से पांडवों के सभी पुत्रों का वध करके वहां से वापस आ गए।
लेकिन जब पांडवों को पुत्रों के वध की खबर मिली तो वे आग बबूला हो गए। पांडवों ने पुत्रों के वध को भगवान शिव की मंशा समझ ली और उनसे लोहा लेने का मन बना लिया। जब पूरी तैयारी के बाद पांडव लड़ाई के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे तो वे काफी क्रोधित हुए। भगवान शिव ने पांडवों से कहा कि तुम भगवान कृष्ण के भक्त हो इसलिए इस जन्म में तुम्हें कोई सज़ा नहीं मिलेगी। लेकिन कलयुग में तुम्हें सज़ा काटने के लिए फिर से जन्म लेना होगा। शिवजी की इस घोषणा के बाद पांडवों को बहुत दुख हुआ था।
Published on:
28 Dec 2017 05:22 pm
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