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Baisakhi 2026: 13 या 14 अप्रैल? कन्फ्यूजन खत्म, जानें सही तारीख और बैसाखी पर निभाई जाने वाली परंपराएं

Baisakhi 2026: बैसाखी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे खासतौर पर सिख समुदाय और किसानों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह कन्फ्यूजन खत्म हो गई है, क्योंकि इस बार बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी।
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भारत

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MEGHA ROY

•

Updated: 4 Apr 2026, 2:02 PM IST

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बैसाखी 2026 कब है 13 या 14 अप्रैल|Freepik

Baisakhi 2026: बैसाखी सिख धर्म का एक बेहद पवित्र और ऐतिहासिक पर्व है, जिसे हर साल बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। तारीख को लेकर अक्सर भ्रम रहता है, लेकिन 2026 में बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह पर्व केवल फसल कटाई से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक बड़े आध्यात्मिक परिवर्तन का प्रतीक भी है। इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, जो सिख इतिहास का अहम क्षण माना जाता है। इसलिए बैसाखी की हर परंपरा में धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता की गहरी झलक देखने को मिलती है।

Baisakhi 2026 Date: सही तारीख

बैसाखी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे खासतौर पर सिख समुदाय और किसानों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह कन्फ्यूजन खत्म हो गई है, क्योंकि इस बार बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन सूर्य सुबह 09:38 बजे मेष राशि में प्रवेश करेगा, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है और इसी के साथ नए सौर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।

बैसाखी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

बैसाखी का दिन सिख इतिहास में बेहद खास स्थान रखता है। साल 1699 में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यह वह समय था जब समाज में अन्याय और भेदभाव चरम पर था। गुरु जी ने एक ऐसे समाज की नींव रखी जो साहस, समानता और धर्मनिष्ठा के सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने पंच प्यारों को अमृत पान कराकर खालसा की शुरुआत की और लोगों को एक नई पहचान दी।

किसानों के लिए खुशियों का पर्व

बैसाखी सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि कृषि से भी गहराई से जुड़ा हुआ त्योहार है। यह रबी की फसल के पकने की खुशी में मनाया जाता है। खेतों में सुनहरी फसल लहराती है और किसान अपनी मेहनत का जश्न मनाते हैं। यह समय गर्मियों की शुरुआत का भी संकेत देता है, जब सूर्य की तेज धूप फसल को पूरी तरह पकाने में मदद करती है।

बैसाखी की परंपराएं और उत्सव

इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन होता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं। पंजाब में इस दिन की रौनक अलग ही देखने को मिलती है, जहां भांगड़ा और गिद्धा जैसे पारंपरिक नृत्य माहौल को जीवंत बना देते हैं।इसके अलावा, मेले लगते हैं, लोग सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं और शाम के समय अलाव जलाकर खुशी जाहिर करते हैं। कई स्थानों पर अमृत संचार समारोह भी आयोजित किया जाता है, जिसमें लोग सिख धर्म की दीक्षा लेते हैं।