विजया एकादशी की महिमा (Vijaya Ekadashi 2023 ) निराली है। इसके प्रताप का बखान कई धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने मनुष्य अवतार में रावण से युद्ध से (Vijaya Ekadashi Katha) पहले इस व्रत को रखा था, जिसका पुण्य फल युद्ध में निर्णायक हुआ। आइये जानते हैं विजया एकादशी डेट और विजया एकादशी पूजा विधि (Ekadashi Puja Vidhi)।
Vijaya Ekadashi 2023: फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी विजया एकादशी की शुरुआत 16 फरवरी को सुबह 5.32 बजे से हो रही है, जबकि यह तिथि 17 फरवरी को 2.49 एएम को संपन्न हो रही है। उदयातिथि में यह व्रत 16 फरवरी को रखा जाएगा।
इस व्रत के पारण का समय 17 फरवरी को सुबह 8.01 बजे से 9.09 बजे तक है। लेकिन वैष्णव विजया एकादशी व्रत 17 फरवरी को है। प्रयागराज के आचार्य प्रदीप पाण्डेय का कहना है कि वैष्णव विजया एकादशी के पारण का समय 18 फरवरी को सुबह 6.51 से 9.09 बजे के बीच है।
विजया एकादशी का महत्व
पद्म पुराण में भगवान शिव ने नारदजी को एकादशी की महिमा बताई थी। उन्होंने अपने उपदेश में कहा था कि एकादशी महान पुण्य देने वाली होती है। वहीं विजया एकादशी के संबंध में मान्यता है कि जो व्यक्ति विजया एकादशी का व्रत रखता है, उसके पितृ और पूर्वज कुयोनि त्यागकर स्वर्ग लोक में जगह पाते हैं। इसके साथ ही व्रत रखने वाले को जीवन में हर सफलता मिलती है, उसे पूर्व जन्म से इस जन्म तक के पाप से मुक्ति मिलती है।
ऐसे करते हैं विजया एकादशी पर पूजा
आचार्य प्रदीप के अनुसार विजया एकादशी व्रत से पहले ही आत्म शुद्धि का कार्य शुरू कर देना चाहिए। इसके लिए व्रत से पूर्व से सात्विक भोजन शुरू कर देना चाहिए, इसके साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मान्यता है कि नियमानुसार यह व्रत रखने से इसके पुण्य स्वरूप व्यक्ति बड़ी से बड़ी कठिनाई पर विजय प्राप्त करता है।
1. एकादशी से एक दिन पूर्व वेदी बनाएं और उस पर सप्तधान रखें।
2. सामर्थ्य के अनुसार सप्तधान पर धातु (सोना, चांदी, तांबा) या मिट्टी का कलश रखे।
3. एकादशी के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
4. पंचपल्लव कलश में रखकर भगवान की प्रतिमा को आसन दें।
5. धूप, दीप, चंदन, फल, फूल, तुलसी आदि से श्री हरि की पूजा करें।
6. उपवास के साथ भगवान की कथा सुनें या पढ़ें।
7. रात में भगवान के नाम का कीर्तन करें और रात्रि जागरण करें।
8. द्वादशी के दिन ब्राह्णण भोजन कराएं और कलश दान कर दें।
9. इसके बाद व्रत का पारण करें।
विजया एकादशी व्रत कथा
एक कथा (Vijaya Ekadashi Katha) के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम जब लंका पर चढ़ाई के लिए भगवान श्रीराम सागर किनारे पहुंचे तो प्रार्थना करने के बाद भी समुद्र रास्ता देने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद भगवान श्रीराम ने वकदालभ्य मुनि की सलाह पर विजया एकादशी व्रत किया, जिसके प्रभाव से समुद्र देवता को भगवान श्रीराम का ज्ञान हुआ और उसने रास्ता दिया। यह भी कहा जाता है कि विजया एकादशी व्रत के फल से रावण को पराजित करने में भगवान राम को सहायता (Vijaya Ekadashi Katha) मिली। इसी के चलते इस एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं।