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सहकारी बैंक घोटाला: धरी रह गई सीआईडी की पहरेदारी, कोर्ट पहुंच गए आरोपी

सहकारी बैंक घोटाले के आरोपियों को पकडऩे में एक बार फिर सीआईडी और पुलिस की पहरेदारी काम नहीं आई। पूर्व से निर्धारित समय के बावजूद आरोपियों को कोर्ट के बाहर गिरफ्तार नहीं किया जा सका। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में दोनों आरोपी पहुंचे और सरेंडर होकर जमानत देने का अनुरोध किया।

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Suresh Kumar Mishra

Jan 03, 2017

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रीवा
सहकारी बैंक घोटाले के आरोपियों को पकडऩे में एक बार फिर सीआईडी और पुलिस की पहरेदारी काम नहीं आई। पूर्व से निर्धारित समय के बावजूद आरोपियों को कोर्ट के बाहर गिरफ्तार नहीं किया जा सका। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में दोनों आरोपी पहुंचे और सरेंडर होकर जमानत देने का अनुरोध किया।

जहां से कोर्ट ने सीआईडी द्वारा पेश की गई डायरी और तथ्यों के आधार पर जमानत देने से इंकार कर दिया। साथ ही दोनों आरोपियों को पांच जनवरी तक की रिमांड पर भेज दिया है।

इसके पहले 29 दिसंबर को सहकारी बैंक डभौरा में हुए घोटाले के आरोपी जवा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष बृजेश उर्मलिया और संदीप सिंह ने कोर्ट में सरेंडर किया था। जहां पर सीआईडी की केस डायरी मौजूद नहीं होने की वजह से कोर्ट ने दोनों आरोपियों को वापस कर दिया था और दो जनवरी को उपस्थित होने के लिए था।

धड़ल्ले के साथ कोर्ट पहुंचे आरोपी
जिस तरह कोर्ट के भीतर प्रवेश किया उसी तरह दोनों आरोपी बाहर भी निकल गए लेकिन न तो पुलिस ने और न ही सीआईडी ने गिर$फ्तारी का प्रयास किया। सोमवार को सीआईडी ने डायरी तो पेश कर दी साथ ही आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए चौकसी भी की गई थी लेकिन वह धड़ल्ले के साथ कोर्ट पहुंचे। यहां पर आरोपी की तरह नहीं बल्कि नेता की तरह उनके समर्थक भी स्वागत के लिए पहुंचे थे। कोर्ट के निर्देश के बाद सीआईडी के अधिकारी दोनों को अपने साथ ले गए।

राजनीतिक संरक्षण के लिए लिया था एक करोड़
पूर्व में गिरफ्तार हुए मुख्य आरोपी रामकृष्ण मिश्रा ने पुलिस को बताया था कि वह घपला करता था तो संरक्षण देने के लिए कई लोगों को रुपए भी दे रहा था। उसमें बृजेश उर्मलिया ने एक करोड़ रुपए नेताओं को देने के लिए लिया था। इसके अलावा संड्रीज एकाउंट से 54 करोड़ रुपए उसके खाते में गए हैं। दूसरा आरोपी संदीप सिंह शराब कारोबारी है जिसके खाते में दो करोड़ से अधिक की राशि ट्रांफसर हुई थी, उसने तो अन्य आरोपियों के खाते में भी राशि ट्रांसफर की है।

पूर्व की रिमांड में खाली
हाथ लौटी
थी सीआईडीघोटाले की जांच को लेकर सीआईडी के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। बीते महीने सहकारी बैंक के पूर्व जीएम व्हीएस परिहार ने सरेंडर किया था। जिसे रिमांड पर लेकर भोपाल और अन्य शहरों में अधिकारी घूमते रहे लेकिन कुछ भी जब्ती नहीं कर प.ाए थे। इस बार भी दोनों आरोपियों के सरेंडर करने के बाद जिस आवभगत के साथ ले जाया गया है उससे सवाल उत्पन्न हो रहे हैं। कोर्ट परिसर में मौजूद कई अधिवक्ताओं ने सीआईडी का यह कहते हुए मजाक उड़ाया कि यह तो फिक्सिंग वाले लोग हैं। हालांकि दावा किया गया है कि दोनों आरोपियों से राशि जब्त की जाएगी।

आरोपियों के प्रति नरमी से उठ रहे सवाल

सहकारी बैंक की वित्तीय व्यवस्था एक ब्रांच डभौरा में हुए घोटाले की वजह से गड़बड़ा गई है। इस मामले में दो एफआईआर दर्ज किए गए हैं दोनों में जांच के प्रति सीआईडी और पुलिस के अधिकारियों की उदासीनता की वजह से आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। अब तक कुल 12 आरोपी पकड़ में आए हैं जिसमें अधिकांश ने कोर्ट में सरेंडर किया है। इसके पहले मुख्य आरोपी भी इस बात का खुलासा कर चुका है कि गिरफ्तारी नहीं करने के लिए पुलिस के अधिकारियों को भी वह सेवा शुल्क देता रहा है। हालांकि राज्य प्रशासनिक सेवा के जिस अधिकारी का नाम उसने बताया था उस पर कोई ठोस कार्रवाई तो नहीं हुई लेकिन तबादला जरूर कर दिया गया था।

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