वास्तव में मां प्रेम, दया, करूणा, ममता, वात्सल्य और त्याग की प्रतिमूर्ति है।
रीवा. समाजसेवी स्व. धीराजू देवी पाण्डेय की 17वीं पुण्यतिथि पर विचार-संगोष्ठी का आयोजन श्रीहर्षण सेवा कुंज ग्राम बरौंहीं पांडेय टोला हनुमना में किया गया। जिसके मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. लहरी सिंह रहे, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समालोचक डॉ. चन्द्रिका प्रसाद ने की। जबकि मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी सुभाष श्रीवास्तव उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक मऊगंज सुखेन्द्र सिंह बन्ना, कथाकार हरिशंकर द्विवेदी, कवियत्री डॉ. आरती तिवारी, सतानंद मिश्रा, अजहर हुसैन चिश्ती रहे।
विचार संगोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. लहरी सिंह ने कहा कि मां के ममत्व का विस्तार अंबर की भांति अनंत है, जिसे किसी पैमाने में मापा नहीं जा सकता। हर धर्म में मां की महिमा का बखान किया गया है। अध्यक्षता कर रहे डॉ. चन्द्रिका प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि मां स्वयं कष्ट में रह कर भी सदैव अपने बच्चों का हित चाहती है। स्वयं खाली पेट रहकर भी अपने बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करती है। वास्तव में मां प्रेम, दया, करूणा, ममता, वात्सल्य और त्याग की प्रतिमूर्ति है।
इस दौरान हाफिज अजहर हुसैन चिश्ती ने मां का महत्व बताते हुए कहा कि कुरान शरीफ़ में भी कहा गया कि मां के पैरों तले जन्नत रहती है। मां का मर्तबा अजब है, जिसे अल्फाज के दायरे में नहीं बांधा जा सकता। कथाकार हरिशंकर द्विवेदी ने कहा कि आज का समय जरा प्रतिकूल दौर से गुजर रहा है। बेटे अपनी मां का सम्मान नहीं कर रहे हैं, उनकी सेवा नहीं कर रहे, उनका कहा नहीं मान रहे। ऐसे विषम, विकट एवं विपरीत दौर में जानकी प्रसाद पाण्डेय ने यदि अपनी मां की याद में कार्यक्रम रखा जो प्रसंसनीय है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती, स्व. धिराजू देवी पाडेण्य एवं स्वामी रामहर्षण दास महाराज के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम में बीबी पाण्डेय, रघुवंश प्रसाद पाण्डेय, आदित्य प्रसाद पाण्डेय, कौशल प्रसाद पाण्डेय, अरूण कुमार पाण्डेय, श्रवण कुमार पाण्डेय, जानकी प्रसाद पाण्डेय, प्रतिभा शैलजा तिवारी, अथर्व पाण्डेय, श्रेया पाण्डेय आदि मौजूद रहे।