
Money has not reached the account of the transport advisory committee
रीवा। बस स्टैंड में यात्रियों को बेहतर सुविधा देने व व्यवस्था की मानीटरिंग करने की जिम्मेदारी परिवहन सलाहाकर समिति को मिली है। इस समिति के अध्यक्ष कलेक्टर एवं सचिव आरटीओ है। बस स्टैंड की व्यवस्था में आने वाले खर्च के लिए राजस्व समित को प्रतिदिन बसों से वसूली की जाने वाली राशि का पचास प्रतिशत समिति के खाते में जमा किया जाना है । बावजूद इसके पिछले 11 सालों से समिति के खाते में एक फूटी कौड़ी नहीं जमा कराई गई है। यहां तक कि इस समिति की बैठक ही नहीं हुई है। जबकि वर्तमान में वसूली दर से प्रतिमाह 1 लाख 92 हजार रुपए समिति के खाते में जाना चाहिए।
वर्ष 2008 में तत्कालीन कलेक्टर एम. गीता ने बस स्टैंड में यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने एवं इसकी निगरानी के लिए समिति गठित किया था। इस समिति को फंड प्रदान करने के लिए प्रतिदिन स्टैड मेंं नगर निगम द्वारा की जा रही वसूली का पचास फीसदी राशि समिति के खाते जमा करने का निर्णय हुआ था। इस राशि से समिति बस स्टैंड में यात्रियों की सुविधा के लिए पेयजल, प्रकाश व अन्य सुविधाओं में व्यय होना था, लेकिन नगर निगम ने यह राशि वसूली करने के बावजूद अभी तक समिति के खाते में स्थानांतरित नहीं की है।
प्रतिदिन 20 रुपए हो रही है वसूली-
बताया जा रहा है कि वर्तमान में नगर निगम बस स्टैंड में बसों से प्रतिदिन 20 रुपए प्रति बस से वसूल रहा है। इसमें 10 रुपए जहां नगर निगम को मिलना है वहीं 10 रुपए की राशि समिति के खाते में जानी है। पिछले 11 सालों से यह राशि खाते में नहीं गई। जिससे बस स्टैण्ड की हालत बदतर है। वर्तमान में शहर के दोनों बस स्टैंड में 600 बसों का प्रतिदिन संचालन हो रहा है। इस दर से प्रतिमाह लगभग 1 लाख 92 हजार रुपए समिति को प्रतिमाह मिलना है।
नहीं आई खातें में राशि-
बस स्टैंड में यात्रियों की सुविधा व व्यवस्था के लिए वर्ष 2008 में परिवहन सलाहकार समिति गठित हुई थी। इसके अध्यक्ष कलेक्टर व सचिव आरटीओ है इस समिति में प्रतिदिन बसों से होने वाली वसूली पचास फीसदी हिस्सा नगर निगम को देना है लेकिन 11 सालों से यह राशि नहीं मिली है।
प्रमोद सिंह, सदस्य व सचिव बस आपरेटर एसोसिएशन
नगर निगम से पैसा लेने होगी कार्रवाई
यह सही है कि बस स्टैंड की व्यवस्था के लिए निगरानी समिति गठित है। लेकिन पिछले किस कारणों से बैठक नहीं हो पाई यह नहीं बता सकता। आचार संहिता आड़े नहीं आई तो इस संबंध में समिति के अध्यक्ष से चर्चा कर बैठक बुलाई जाएगी। साथ ही नगर निगम से पैसा लेने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
मनीष त्रिपाठी, सचिव व आरटीओ
Published on:
06 Apr 2019 01:43 pm

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