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रिटायर्ड इंजीनियरों की टीम ने तैयार की 600 पेज की रिपोर्ट, बताया बार-बार बाढ़ की विभीषिका क्यों झेलता है रीवा शहर

आप भी जानें कारण और व्यवस्था के लिए प्रशासन पर बनाएं दबाव, क्योंकि प्राकृतिक कारणों की बजाय मानव जनित व्यवधानों से आ रही बाढ़

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रीवा

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Mrigendra Singh

Jun 23, 2018

Reasons for Floods and Measures

Reasons for Floods and Measures

रीवा. तेज बारिश जब भी आसपास होती हैतो रीवा शहर में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। कईबार इस विभीषिका का सामना शहर के लोग कर चुके हैं। बारिश बढ़ते ही बाढ़ का मंजर उनके मन में दिखने लगता है। इस समस्या से निपटने के लिए कई बार योजनाएं बनी लेकिन मूर्तरूप नहीं दिया जा सका। शासन बजट भी दे रहा है, जिसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। शहर के रिटायर्डइंजीनियरों ने समस्या को बारीकी से देखा और ६०० पेज की समग्र रिपोर्टतैयार की है। इसमें बाढ़ आने के तकनीकी और व्यवहारिक कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बारिश के पानी के बहाव का प्रबंधन सही तरीके से नहीं कर पाने से उसमें ठहराव आता हैऔर वही बाढ़ का रूप ले लेता है। अध्ययन टीम में रिटायर्डचीफ इंजीनियर्स लेवल के कईविशेषज्ञ शामिल रहे हैं।

दो दशक में आईबाढ़ का ब्यौरा भी दिया
इंजीनियर्स की इस रिपोर्टमें बीते करीब दो दशक में हुए जलभराव का विस्तृत अध्ययन है। इसमें बीहर नदी पर चोरहटा-रतहरा मार्ग पर निर्मित एवं विक्रमपुल सहित अन्य प्रमुख निर्माण कार्यों का उल्लेख है। नदियों में अधिकतम प्रवाह अनुमान क्रमश: 3737.0, 3422, 3415 एवं 146 6 घनमीटर बताया गया है। नदियों में पानी तो अधिक मात्रा में आता हैलेकिन पुलों का आकार सही नहीं होने के चलते उस गति से प्रवाह नहीं हो पाता।

रिपोर्ट में बाढ़ के कारण और समाधान भी सुझाए

बिछिया में बना रहेगा खतरा
बिछिया पुल का बाढ़ स्तर भौगोलिक परिस्थितियों एवं निचले क्षेत्र में निर्मित होने के चलते तेज बारिश के दौरान खतरे के निशान में ही रहेगा। यहां पानी के बहाव की रफ्तार धीमी हो जाती है, भौगोलिक परिस्थितियां भी ऐसी हैं।
समाधान : पुल की ऊंचाई बढ़ाने और पिलर के बीच स्थान और छोडऩे की बात कही गई है।

बीहर बैराज का पानी बाढ़ का कारण
शहर में बीहर और बिछिया दो नदियां बहती हैं, इनमें आसपास के गांवों का भी पानी आता है। इनका पानी बीहर बैराज में जाता है, जहां समय पर पानी आगे निकासी नहीं किए जाने से नदी का बहाव रुकने लगता है। इससे कईबार उल्टा मोहल्लों की ओर पानी पहुंच चुका है।
समाधान : रिपोर्ट में कहा गया है कि बैराज के संचालक के लिए प्रोटोकॉल निर्धारित किया जाए। वह बाढ़ की आशंका को ध्यान में रखते हुए समय पर ही आगे पानी को छोड़ते रहें।

बीहर का टापू बनाता है बैलेंस
सामान्यतौर पर शहर के लोग बीहर नदी के टापू को भी बाढ़ का प्रमुख कारण मानते हैं लेकिन इंजीनियर्स इससे साफ इंकार कर रहे हैं। इनका कहना हैकि यहां टापू होने से पानी का भंवर बनता है और आगे की गति तय करता है। इसके नहीं होने से बहाव तो तेज हो जाएगा, जिससे उन्नत विक्रम पुल पर खतरा भी बना रहेगा वह कभी भी नुकसान पहुंचा सकता है।

रेड जोन एरिया चिह्नित किया जाए
नगर निगम एवं आपदा प्रबंधन द्वारा नदियों और प्रमुख नालों के खतरे के निशान वाले लेवल को चिह्नित नहीं किया गया है। वर्ष२०१६ में आईबाढ़ के बाद नदी के किनारे कुछस्थानों पर निशान लगाए गए थे, जो अब बहुत कम नजर आते हैं। कहा गया हैकि नदियों के किनारे और पुलों के पास अनिवार्य रूप से अब तक आए बाढ़ के खतरों को वर्षवार चिह्नांकित किया जाए।

अतिक्रमण रोक रहा पानी का बहाव
नदियों के साथ ही शहर के कुछ प्रमुख मोहल्लों का भी अध्ययन किया गया है। इसमें नालों से लेकर नदियों के बैंक एरिया तक में अतिक्रमण किए जाने का उल्लेख है। पानी की अधिक मात्रा होने के दौरान बहाव नहीं हो पाता। अमहिया नाले में बीते साल ग्रीन बेल्ट निर्धारित करने के बाद भी कार्रवाई नहीं करने पर भी सवाल उठाए गए हैं। बीहर और बिछिया नदियों में भी तेजी के साथ अतिक्रमण कर बनाए जा रहे पक्के मकानों पर चिंता जाहिर की गईहै।

ये प्रमुख सुझाव भी दिए गए
- शहर के इंटरनल ड्रेनेज सिस्टम को स्थानीय मोहल्लों में स्टार्म वाटर ड्रेन की क्षमता लेवल तथा निकासी बिन्दु पर विशेष ध्यान देने की जरूरत।
-बिछिया और बीहर के कैचमेंट एरिया में वनीकरण अनिवार्य रूप से किया जाए। यहां पर खरीफ में पानी का संग्रहण करने और रबी में खेती करने की पुरानी परंपरा को अपनाना होगा।
-शहर के नालों के ग्रीन बेल्ट का अतिक्रमण हटवाकर पौधे रोपे जाएं।
-वर्ष 2016 में 298 मीटर तक पानी बीहर में था, इस कारण दोनों नदियों के पुलों की लंबाईबढ़ाना चाहिए।

मानव जनित व्यवधान बन रहे वजह
डॉ. एनपी मिश्रा, रिटायर्ड एसई जलसंसाधन का कहना है कि शहर में बाढ़ प्राकृतिक कारणों के बजाय मानव जनित व्यवधानों की वजह से आ रही है। कईबार यहां की समस्याओं को हम सबने देखा, इस कारण तय किया है कि इंजीनियरिंग के नजरिए से इसके कारण और उपाय खोजे जाएं। विस्तृत रिपोर्टतैयार की है, लोग इसके बारे में जानें और प्रशासन से कहें की वह व्यवस्था बनाए।

पानी के बहाव का प्रबंधन जरूरी
एसबी सिंह परिहार, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर का कहना है हम सब शहर में रहते हैं इस कारण यहां की समस्याओं को लेकर मन में दर्द उठता है। इसी वजह से सबने तय किया कि लोगों को प्रमुख वजह बताईजाए। शहर में अतिक्रमण से लेकर बीहर बैराज तक का अध्ययन किया गया है। पानी के बहाव का समय पर प्रबंधन हो जाए तो बाढ़ के खतरे को टाला जा सकता है। हर मोहल्ले की समस्या की रिपोर्ट तैयार की है।

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