
bundelkhand medical college
सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्डों में मरीजों का हाल बेहाल है। वार्ड क्रमांक 6 में तो स्थिति दयनीय है। छत से टपकता पानी, गंदगी और बदबू से मरीज हैरान हैं। वहीं नर्सिंग स्टाफ को मास्क पहनकर काम करना पड़ रहा है। वार्ड क्रमांक 6 में करीब छह जगहों से सीलिंग से पानी गिर रहा है। ये पानी लगने से कुछ पंखे भी खराब हो गए हैं। यह इसलिए हो रहा क्योंकि वार्ड की छत में से टॉयलेट के पाइप निकले हैं, जो अब क्षतिग्रस्त हो गए हैं और गंदा पानी टपक रहा है।
उखड़े टाइल्स चुके, कमजोर हो रही छत
मेडिसिन वार्ड नंबर-६ के ऊपर वार्ड नंबर-14 में नीचे सीलन से टाइल्स धंसकर टूट गए हैं। कई तो पैर रखने तक में हिल रहे हैं। लगातर बढ़ रही सीलन के कारण छत कमजोर होती जा रही है। स्थिति यह है कि टाइल्सों को तोड़ते हुए पलंग भी धंस गए हैं।
टॉयलेट की दुर्गंध से मरीज परेशान
मेडिसिन वार्ड नंबर-5 के पास कॉमन टॉयलेट में तो गंदगी की भरमार है। यहां से गुजरने पर ही लोगों को उलटी आ जाती है। यहां मौजूद सफाई कर्मचारियों ने बताया कि कोई पाइप चोक हो जाने के कारण टॉयलेट का पानी नहीं निकल पा रहा है। डेढ़ साल से ऐसा ही हो रहा है।
पलंग के पास नहीं रखे हैं डस्टबिन
मेडिकल कॉलेज के किसी भी वार्ड में मरीजों के पलंग के पास डस्टबिन नहीं रखे गए हैं। यदि किसी मरीज को उल्टी आए तो ऐसे में उसे टॉयलेट तक ले जाना मुमकिन नहीं होता। मजबूरी में मरीजों के परिजन स्वयं ही डस्टबिन खरीदकर ला रहे हैं।
छह वार्डों के लिए एक वॉटर फिल्टर
यहां मरीज और उनके परिजन पानी लाने के लिए अस्पताल के नीचे आते हैं या फिर जिन्हें जानकारी है वे 100 मीटर की दूरी तय करके यहां रखे वॉटर कूलर से पानी ले आते हैं। यहां छह वार्डों के मरीजों व उनके परिजनों के लिए मात्र एक ही वाटर कूलर है। इससे उन्हें पेयजल के लिए भटकना पड़ता है।
हाउसिंग बोर्ड बिल्डिंग बनाकर चला गया है। इसे अब पीडब्ल्यूडी के हैंडओवर किया जाना है। इसके बाद ही ये काम हो सकेंगे। इस बीच हम भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन फिर भी दिखवाया जाएगा कि कहां परेशानी है। छत से पानी क्यों टपक रहा है। वार्ड की और सफाई कराई जाएगी। वहीं कॉमन टॉयलेट में पाइप चोक होने के मामले को भी दिखवाया जाएगा।
आरएस वर्मा, बीएमसी अधीक्षक
Published on:
08 Nov 2017 09:48 pm
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