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चांदी के विमान पर विराजमान होकर निकले श्रीजी, भक्तों ने जगह-जगह उतारी आरती

भाग्योदय तीर्थ में चल रहे 10 दिवसीय कल्पद्रुम समवशरण विधान के समापन रविवार को शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में चांदी और लकड़ी के विमानों पर विराजमान कर श्रीजी निकले। जगह-जगह भक्तों ने श्रीजी की आरती उतारी।

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सागर

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Rizwan ansari

Oct 14, 2024

कल्पद्रुम समवशरण विधान के समापन निकली शोभायात्रा

कल्पद्रुम समवशरण विधान के समापन निकली शोभायात्रा

कल्पद्रुम विधान के समापन पर निर्यापक मुनि सुधा सागर महाराज के सानिध्य में निकली शोभायात्रा

सागर. भाग्योदय तीर्थ में चल रहे 10 दिवसीय कल्पद्रुम समवशरण विधान के समापन रविवार को शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में चांदी और लकड़ी के विमानों पर विराजमान कर श्रीजी निकले। जगह-जगह भक्तों ने श्रीजी की आरती उतारी। जिनेंद्र देव विमानों के साथ 31 बग्गी में सवार होकर महापात्र चल रहे थे। निर्यापक मुनि सुधा सागर महाराज का संघ, ब्रह्मचारी भैया-बहनें और 1000 से अधिक इंद्र-इंद्राणी केसरिया ध्वज लिए कतार में नगर के मुख्य मार्ग से चल रहे थे। शोभायात्रा वर्णी भवन मोराजी से शुरू होकर बड़ा बाजार, कोतवाली, तीनबत्ती, कटरा बाजार, विजय टॉकीज, माता मढिय़ा, राहतगढ़ बस स्टैंड, ओवर ब्रिज से होते हुए भाग्योदय तीर्थ में समाप्त हुई। समापन के अवसर पर विधान स्थल पर हवन किया। हजारों इंद्र-इंद्राणी ने एक साथ कुंड में देशभर में सुख-शांति के लिए आहुतियां दीं। सुबह 7 बजे से शुरू हुआ कार्यक्रम दोपहर 1 बजे समाप्त हुआ।
3 अक्टूबर से शुरू हुआ विधान
निर्यापक मुनि सुधा सागर महाराज के सानिध्य एवं प्रदीप भैया के निर्देशन में तीन अक्टूबर को विधान शुरू हुआ था। इस विधान में 25 मंडल बनाए गए थे, जिसमें चयनित महापत्रों एवं 1000 से अधिक इंद्र इंद्राणियों ने विधान की संपूर्ण क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य के निर्देशन में सम्पन्न कीं। महाराज के सानिध्य में यह सागर प्रवास के दौरान 8वीं शोभा यात्रा निकाली गई। कमेटी ने ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया का सम्मान किया।
समय सार की कक्षाएं आज से प्रारंभ
चातुर्मास समिति के मीडिया प्रभारी एड. अशोक जैन ने बताया कि निर्यापक मुनि पुंगव सुधासागर महाराज में सोमवार से समय सार की कक्षाएं सुबह 5.30 बजे से 6.30 बजे एवं दोपहर 2.30 बजे से 3.30 बजे प्रारंभ होगीं। इन कक्षाओं में मुनि एवं आर्यिका संघ के अलावा त्यागी, सांगानेर संस्थान के बहनों के अलावा, रुचिपूर्वक कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 20 अक्टूबर को एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। प्रतियोगिता का विषय समवशरण का वरण नामक पुस्तक के अध्ययन है।