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कचेरन माता : लड़ाई-झगड़े के विवाद निपटाने लगाते हैं अर्जी

कचेरन माता : लड़ाई-झगड़े के विवाद निपटाने लगाते हैं अर्जी

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कचेरन माता : लड़ाई-झगड़े के विवाद निपटाने लगाते हैं अर्जी

कचेरन माता : लड़ाई-झगड़े के विवाद निपटाने लगाते हैं अर्जी

जैसीनगर. जैसीनगर से 11 किमी दूर जंगल में ग्राम पंचायत करैया एवं चांदोनी गांव के पास मां कचेरन विराजमान हैं। माता का मंदिर बहुत ही प्राचीन है, यहां पर लोग हमेशा से माता के सामने अपनी समस्याएं लेकरआते है।
लड़ाई झगड़ा, जमीनी विवाद आदि के केसों को सुलझाने के लिए मां के सामने रखते हैं। बताया जाता है कि किसी व्यक्ति का यदि केस न्यायालय में चल रहा है और वह मां कचेरन के यहां अर्जी लगा देता है तो उस केस का फैसला जल्द आ जाता है।
जब लोगों के केस निपट जाते हैं तो माता के यहां चढ़ावा चढ़ाने के लिए आते हैं। इसीलिए इस प्राचीन मंदिर को कचहरी मंदिर या माता कचेरन का मंदिर कहते हैं। इलाके के लोग मां को न्यायाधीश मानते हैं। पुजारी का कहना है कि यहां पर मां अंजनी के साथ हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है और प्रतिमा पुरानी है। गांव के ग्रामीण बताते हैं कि रात 12 बजे के बाद इस स्थान पर कोई नहीं रुक सकता क्योंकि रात 12 बजे के बाद आसपास के देवी देवताओं की कचहरी भी लगती है। गुरुवार को प्रात: 9 बजे क्षेत्र के श्रद्धालुओं कचेरन माता के चरणों में 51 झंडे अर्पित करने पहुंचे।
भक्तों ने किए अबार माता के दर्शन
बंडा. बंडा से 60 किमी दूर एवं उत्तरप्रदेश सीमा की सीमा से लगी छतरपुर जिला की विधानसभा क्षेत्र बडा मलहरा के पास अबार माता का मंदिर आस्था का केंद्र है। नवरात्र पर बडी संख्या में श्रद्धालु पैदल माता के दर्शन को जाते हैं। श्रद्धालु मनोकामना लेकर माता के दरबार में जाते हैं। बुधवार को भक्तगण भूपेन्द्र सिंह लोधी के नेत्तृव में अबार माता के दर्षन के लिए पैदल रवाना हुए।

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