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संस्कृति का संजोने बोलते हैं मराठी, टीवी सीरियल और फिल्म भी देखतें हैं मराठी

हर साल 27 फरवरी को मराठी भाषा दिन मनाया जाता है। इस दिन को मराठी भाषा दिवस, मराठी राजभाषा दिन के नाम से भी जाना जाता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध मराठी कवि विष्णू वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) के जन्मदिन को मराठी भाषा गौरव दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

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सागर

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Atul Sharma

Feb 27, 2021

संस्कृति का संजोने बोलते हैं मराठी, टीवी सीरियल और फिल्म भी देखतें हैं मराठी

संस्कृति का संजोने बोलते हैं मराठी, टीवी सीरियल और फिल्म भी देखतें हैं मराठी


सागर.हर साल 27 फरवरी को मराठी भाषा दिन मनाया जाता है। इस दिन को मराठी भाषा दिवस, मराठी राजभाषा दिन के नाम से भी जाना जाता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध मराठी कवि विष्णू वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) के जन्मदिन को मराठी भाषा गौरव दिवस के तौर पर मनाया जाता है। आमतौर पर महाराष्ट्र में बोली जाने वाली इस भाषा की बोली ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। कहा जाता है कि विविधताओं के देश भारत में हर 12 कोस पर संस्कृति और बोली बदलती है। शहर में मराठी परिवार हैं, जो आम बोलचाल की भाषा में मराठी बोलते हैं। मराठी भाषा में साहित्य भी लिखा जा रहा है।

संस्कृति को सहजने बोलते हैं मराठी
डॉ. हरिसिंह गौर विवि में प्रो. जीएल पुणतांबेकर ने बताया कि घर में हम ही नहीं बच्चे भी मराठी बोलते हैं। यह हमारी संस्कृति है, इसलिए जब भी हम अपनी समाज के लोगों से मिलते हैं तो मराठी भाषा में ही बात करते हैं। जो कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है उसमें भी मराठी भाषा होती है। उन्होंने बताया कि मराठी साहित्य ने अपनी खास जगह बनाई है। पत्र-पत्रिका हमें मराठी में पढऩा पसंद है।

मराठी में देखते हैं टीवी सीरियल
स्वाती हल्वे ने बताया कि बोलचाल सहित टीवी सीरियल और फिल्म भी मराठी में देखते हैं। बच्चों को भी मराठी पसंद है। महाराष्ट्रीयन समाज के लोग भी सागर में बड़ी संख्या में है। जो अपनी मातृभाषा के लिए बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।

मराठी भाषा में किया पुस्तक का अनुवाद
शहर की सक्रिय संस्था श्यामलम द्वारा भारत में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं पर चर्चा के उद्देश्य से भाषा विमर्श शीर्षक से शुरू की गई कार्यक्रमों की अभिनव श्रंखला के अंतर्गत मराठी भाषा पर केंद्रित विमर्श किया गया था। इस अवसर पर लेखिका डॉ.चंचला दवे के हिंदी काव्य संग्रह गुलमोहर का लेखिका डा.संध्या टिककर द्वारा मराठी में अनूदीत पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया था।