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वेटिंग टिकट वाले यात्री सीट मिलना आसान, खाली बर्थ तुरंत हो रही अपडेट

अब वेटिंग टिकट वाले यात्री को सीट मिलना आसान हो गया है. टीटीइ यात्री का टिकट वेटिंग में है, तो वह उसे तुरंत सीट उपलब्ध करा सकते हैं।

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वेटिंग टिकट वाले यात्री सीट मिलना आसान, खाली बर्थ तुरंत हो रही अपडेट

वेटिंग टिकट वाले यात्री सीट मिलना आसान, खाली बर्थ तुरंत हो रही अपडेट

बीना. अब वेटिंग टिकट वाले यात्री को सीट मिलना आसान हो गया है, क्योंकि दिन-ब-दिन टीटीइ हैंड हेल्ड टर्मिनल डिवाइस से लैस हो रहे हैं, इस डिवाइस के माध्यम से तुरंत खाली सीट अपडेट हो जाती है, ऐसे में किसी यात्री का टिकट वेटिंग में है, तो वह उसे तुरंत सीट उपलब्ध करा सकते हैं। जिससे यात्री को सफर में आसानी होगी, लेकिन इसके लिए यात्री भी जागरूक रहें, अगर उनकी सीट कन्फर्म नहीं हुई है, तो यात्री टीटीइ को बोलकर सीट देने के लिए कहें, उनसे यह भी कहे की वे अपने इस डिवाइस के माध्यम से खाली सीट सर्च कर दें।

जानकारी के अनुसार डिजिटल की तरफ बढ़ रहे रेलवे में अब टीटीइ हैंड हेल्ड टर्मिनल (एचएचटी) डिवाइस से लैस हो रहे हैं। मंडल से चलने वाली व आने वाली 150 ट्रेन के टीटीइ के हाथों में यह डिवाइस आ गई है। जिससे वह पेपरलेस हो गए हैं। इस डिवाइस से टीटीइ ट्रेन में खाली बर्थ के संबंध में अपडेट रहते हैं। इसके जरिए खाली बर्थ की जानकारी ऑनलाइन सर्वर में पहुंचने लगी है। वेटिंग टिकट के यात्री को बर्थ मिलने में आसानी हो गई है और चलती ट्रेन में अगर सीट खाली रहती है, तो टीटीइ इसे पहले आरएसी और उसके बाद वेटिंग यात्रियों को देते हैं। पहले यह काम मैनुअल आधारित होने से अधिकांश मामले में टीटीइ अपनी मनमर्जी से चलते थे, जिससे कई बार खाली सीट वास्तविक यात्री की जगह दूसरे यात्री को थमा देते थे। इसलिए व्यवस्था में बदलाव करते हुए यह नई व्यवस्था की गई है।

ऐसे समझें- ट्रेन के किसी कोच में अगर यात्री रिजर्वेशन कराता है और किसी कारण वह नहीं आता है, तो अब नई व्यवस्था में ट्रेन जंक्शन से निकलने के बाद सीट की जानकारी सिस्टम में लोड हो जाती है, जो ट्रेन जिस भी दिशा में जा रही है। उसके स्टॉपेज वाले स्टेशन से दूसरे यात्री को दी जा सकती है, जिसमें जंक्शन से जाने के बाद उसे गंज बासौदा, ललितपुर य सागर पहुंचने तक खाली सीट को किसी दूसरे यात्री को दे सकते हैं जबकि पहले टीटीइ उसे भोपाल या झांसी पहुंचने के बाद ही इसकी जानकारी देते थे। इस बीच सीट टीटीइ के हवाले रहती थी।

पहले आफत समझ रहे थे, अब बनी सुविधा

लगभग छह महीने पहले भोपाल मंडल में हैंड हेल्ड टर्मिनल आने के बाद यह टीटीइ को दिए गए, लेकिन शुरू में टीटीइ इसे आफत समझ रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे यह अच्छी सुविधा टीटीइ को रास आने लगी है, इससे करंट टिकट, रिफंड होने की जानकारी मिलने के साथ टीटीइ पेपर लैस हो गए हैं।

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हैंड हेल्ड टर्मिनल से टीटीइ अपडेट रहते हैं। अब टीटीइ पेपर की जगह इस डिवाइस को लेकर अपना काम करने लगे हैं। इससे यात्रा में सुगमता आई है।

-सुबेदार सिंह, पीआरओ, भोपाल