
सागर. मैली बनियान, फटी और छोटी तौलिया लपेटे पसीने से लथपथ एक अधेड़ व्यक्ति। धधकती भट्टी के सामने खड़ा होकर कभी लोई को परथन से लपेटता तो कभी माथे पर आ रहे पसीने को हाथ की कलाई से पोंछ लेता। इसी बीच आवाज आती... रामेश्वर कितनी देर लगा रहे हो रोटी सेंकने में, जरा जल्दी करो।
जी हां, ये नजारा था बस स्टैंड के उस होटल का, जहां एक टाइम में बीस लोग बैठकर भोजन कर रहे थे। मौके पर होटल में न तो सफाई थी और न ही पीने का साफ पानी। ये केवल एक होटल का हाल नहीं है। शहर के मुख्य बाजार से लेकर गली-कूचों में संचालित ज्यादातर होटल्स-रेस्टोरेंट में यही आलम है। फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दो महीने पहले रेस्टोरेंट-होटलों में ग्राहकों को साफ-सुथरा खाना उपलब्ध कराने के लिए नियम बना दिए थे। इन नियमों का कितना पालन हो रहा है, यही पड़ताल पत्रिका टीम ने रविवार को शहर के कुछ होटलों में की।
स्थान : सरकारी बस स्टैंड
समय : दोपहर १२.३७ बजे
लाइव: सरकारी बस स्टैंड की होटल के बाहर किचन में बनियान पहने एक व्यक्ति भट्टी में फ्राइपेन पर तड़का लगा रहा था। बस स्टैंड की बिल्डिंग के ऊपर रखी गंदी सी टंकी से किचन में पानी की सप्लाई थी। इसी टंकी का पानी लोगों को पीने के लिए दिया जा रहा था और यही पानी सब्जी व रोटी के लिए प्रयोग में लिया जा रहा था। टंकी भी एेसी जगह रखी थी, जिसमें चढ़कर उसकी सफाई असंभव है। टंकी चालू करने के बाद शायद ही कभी उसकी सफाई हुई हो। खाना परोसे वाले हाथ भी एेसे थे मानों इनका लंबे समय से पानी से मेल ही न हुआ हो।
स्थान : प्रायवेट बस स्टैंड
समय : दोपहर १२.५५ बजे
लाइव : प्राइवेट बस स्टैंड के पीछे तालाब के सामने टैक्सी स्टैंड के पास स्थित होटल का नजारा तो मानो गंदगी की तस्वीर दिखा रहा था। होटल में उपयोग होने वाले पानी की टंकी जमीन पर रखी थी, कोई भी आता उसी में डुबोता और पानी निकाल कर पीता है। हवा चली तो कचरा भी उड़कर गिर जाता। और जिस स्थान को होटल का किचन कहा जाता है वहां तो एेसी गंदगी की कोई देख ले तो कभी वहां खाना ही न खाए। हालांकि यह मुसाफिरों की मजबूरी है कि वह घर से दूर अपनी भूख मिटाने के लिए इस तरह का खाना खा रहे हैं।
विभाग ने ये मानक किए तय
किचन में प्रवेश से पहले हाथ पैर साबुन से धोने होंगे, इसके लिए साफ वॉशरूप भी होना चाहिए।
खाना बनाने और उसे परोसने वाले होटल-रेस्टोरेंट के कर्मचारियों का साल में दो बार स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा।
कच्चे-पके हुए खाने की हर साल अधिकृत लैब से जांच करवाना होगी और इसका सर्टिफिकेट रखना होगा।
कर्मचारियों को एपिक हैण्ड ग्लब्स कैप लगाना होंगे। दूध और कच्ची सब्जी व नॉनवेज ४ डिग्री तापमान में रखना होगा।
किचन की चप्पल होंगी। वेंटिलेशन व रोशनी की व्यवस्था होगी। छोटे बर्तन से लेकर परिसर में सफाई जरूरी।
किचन स्टैंड और दीवार के कॉर्नर पर गंदगी न जमें इसके लिए कॉर्नर गोलाई वाले होने चाहिए।
& होटल में सफाई के साथ भोजन पकाने के निर्देश सभी को दे दिए गए हैं और स्पष्ट कह दिया गया है कि ग्राहक को आरओ वाटर पीने के लिए दिया जाए और यही पानी भोजन पकाने में इस्तेमाल किया जाए। अब विभागीय स्तर पर होटलों की जांच की जाएगी। जहां भी मानक के विहीन खाना पकाते हुए कोई पाया जाता है तो एक्ट के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पंकज श्रीवास्तव, जिला खाद्य सुरक्षा निरीक्षक
Published on:
07 May 2018 01:45 pm
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
