-वल्चर रेस्टोरेंट से प्रदेश में गिद्धों को मिलेगा नया जीवन-बुंदेलखंड के छह जिले श्रेष्ठ आवास
सागर। प्रदेश में संकटग्रस्त गिद्धों को बचाने के लिए बुंदेलखंड में अनूठी पहल शुरू होगी। यहां गिद्धों के लिए वल्चर रेस्टोरेंट बनाए जाएंगे। इन रेस्टोरेंट में गिद्धों को परीक्षण के बाद रसायनमुक्त आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। बता दें कि देश भर में गिद्धों के लिए बुंदेलखंड सबसे सुरक्षित जगह है। यहां वन विभाग के साथ राष्ट्रीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, वीएनएचएस, डब्ल्यूएफ जैसी संस्थाओं के विशेषज्ञ गिद्धों पर अध्ययन करेंगे।
इसलिए बना रहे वल्चर रेस्टॉरेंट
वन्यप्राणी संस्थान देहरादून, डब्लूडब्लूएफ और वीएनएचएस मुंबई जैसी संस्थाओं के अध्ययन में डायक्लोफेनिक, क्लोरोफेनॉक, नेमिसिलाइड, कार्पोफेन जैसी दवाएं गिद्धों के लिए नुकसानदेह है। इन दवाओं के प्रभाव से गिद्धों के गुर्दे खराब हो जाते हैं और इनकी ब्रीडिंग भी प्रभावित होती है। इसी को देखते हुए बुंदेलखंड में 100 वर्ग किमी दायरे में वल्चर रेस्टॉरेंट बनाए जा रहे हैं।
ऐसे होंगे वल्चर रेस्टोरेंट
वल्चर रेस्टोरेंट में बड़ी आवादी वाले क्षेत्रों के आसपास ऐसे बाड़े बनाए जाएंगे, जहां मृत मवेशियों को परीक्षण के बाद रखा जाएगा। इससे गिद्धों को रसायनमुक्त आहार उपलब्ध होगा। इससे उनकी आबादी तेजी से बढ़ने लगेगी। अभी महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में इसका प्रयोग किया जा रहा है।
एक्सपर्ट व्यू
गिद्धों के सुरक्षित रहवास के मामले में बुंदेलखंड प्रमुख क्षेत्र बन गया है। इसे देखते हुए इस अंचल को गिद्धों के अध्ययन के लिए देश के 6 प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। गिद्धों को सुरक्षित आहार उपलब्ध कराने जल्द ही वल्चर रेस्टोरेंट तैयार किए जाएंगे।
- एए. अंसारी, डीएफओ नौरादेही अभयारण्य, सागर
प्रदेश के 53 जिलों के मुकाबले बुंदेलखंड के छह जिले गिद्धों के लिए सबसे अनुकूल हैं। वर्ष 2021 में हुई वल्चर काउंटिंग में मप्र में गिद्धों की संख्या 9446 थी, जबकि इसमें से एक-चौथाई से ज्यादा संख्या अकेले बुंदेलखंड में पाई गई थी, जो अब और बढ़ गई है। वल्चर काउंटिंग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सागर, पन्ना, रायसेन, भोपाल, मंदसौर, नीमच, श्योपुर और शिवपुरी गिद्धों के रहवास वाले प्रमुख जिले हैं।